
० सुंदरीकरण का कोई प्रयास नहीं
जगदलपुर। जिला मुख्यालय से लगे नगर पंचायत बस्तर मे ऐतिहासिक नरोना तालाब नगर पंचायत की उपेक्षा के चलते अपना वजूद खो चुका है। तालाबों का अस्तित्व बचाने व भू जल स्तर बढ़ाने की मंशा से सरकार सरोवर धरोहर योजना के तहत जलाशयों का उन्नतिकरण व सुंदरीकरण के लिए भारी -भरकम बजट खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ क्रियान्वयन एजेंसियों की लापरवाही से कई ऐतिहासिक जलाशय विलुप्त हो रहे हैं।
नगर पंचायत बस्तर के बुजुर्ग कोड़ी नाग ने बताया कि रियासत काल मे सात कोड़ी सात आगर यानी 147 तालाब मौजूद थे। इनमे ग्रामीण निस्तारी के साथ खेती का काम भी करते थे। ग्राम के ऐतिहासिक तालाबों में राजा तालाब, रानी तालाब आज भी लोगों को पुराने दिनों का स्मरण कराते हैं। कई तालाब अतिक्रमण की चपेट मे आ गए। यह वे तालाब हैं जो काकतीय राजाओं के वंशजों के द्वारा बनाए गए थे। राष्ट्रीय राजमार्ग से लगा हुआ लगभग 6 एकड़ का नरोना तालाब आज भी 1951-52 में पदस्थ कलेक्टर आरपी नरोना के नाम पर जाना जाता है। उन्होंने ग्रामीणों के साथ श्रमदान कर इस तालाब का गहरीकरण कर जीर्णोद्धार किया जिसे लोग आज भी भूले नही है। तत्कालीन कलेक्टर आर पी नरोना ने लोगों से श्रमदान की अपील कर यह तालाब खोदवाया था। आज समूचे गांव सहित पूरे क्षेत्र में आमजन इस तालाब को नरोना तालाब के नाम से जानते हैं। वर्तमान मे यह तालाब जलकुम्भी से अटा पड़ा है। तालाब बुरी तरह प्रदूषित हो गया है, जिससे ग्रामीण निस्तारी के रूप मे उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। नगर पंचायत इस ओर उदासीन नजर आ रहा है।
नहाने योग्य पानी नहीं, स्नान घाट बना दिया
तालाब का पानी प्रदूषित होने से यहां नहाने आने की बात तो दूर यहां लोग अपने मवेशी तक नहीं नहलाते हैं। दो साल पहले नगर पंचायत ने यहां महिला स्नान घाट व प्रतीक्षालय बनवाया है। इसका कोई उपयोग नहीं है। ग्रामीण कहते है कि पंचायत ने बिना सोचे समझे ही इसका निर्माण करवा कर शासन की राशि का दुरूपयोग किया है।