० बिल देख उड़ रहे हैं लोगों के होश,स्मार्ट मीटर ने बढ़ाई दी है परेशानी : जैन
जगदलपुर। पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार लोगों को बिजली के झटके पर झटके दे रही है। भारी भरकम बिल देख लोगों के होश गुम हो रहे हैं। जहां पिछले माह तक हजार दो हजार के बिल आ रहे थे, इस माह चार से पांच हजार रुपए तक के बिल थमाए जा रहे हैं। जगदलपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा है कि राज्य की भाजपा सरकार को आम जनता की दयनीय होती जा रही हालत से कोई लेना देना नहीं है। जनता के दुख दर्द से भाजपा का कोई वास्ता नहीं रह गया है। भाजपा सरकार को श्वेत पत्र जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। राज्य में ऐसी स्थिति तब है जब छत्तीसगढ़ राज्य की गणना सरप्लस बिजली वाले स्टेट के रूप में की जाती है। यहां न केवल कोयले की खदानें हैं, बल्कि कोयला आधारित बिजली घरों की स्थापना भी की गई है। इन परिस्थितियों में इस माह बिजली बिल में बेतहाशा वृद्धि से आमलोगों की कमर टूट गई है। एक तरफ मुख्यमंत्री स्वयं को गरीब परिवार का बताते हैं तो दूसरी तरफ वे गरीब परिवारों की सुध लेना छोड़ अमीर की गोद में बैठे दिख रहे हैं। श्री जैन ने कहा है कि मध्यम वर्ग के लोग तो जैसे तैसे बिजली बिल भर दे रहे हैं, लेकिन दो जून की रोटी के लिए जमकर पसीना बहाने वाले परिवारों के लिए मुख्यमंत्री का चिंतित न होना खेदजनक व चिंतनीय है।
मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती
पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने कहा है कि राज्य में जबसे भाजपा सत्ता में आई है तबसे बिजली कटौती बढ़ गई है। प्लान मेंटेनेंस के नाम पर हो रही घंटों की बिजली कटौती से न केवल आम उपभोक्ता परेशान हो रहा है बल्कि घरेलू उद्योग-धंधे भी चौपट हुए जा रहे हैं। श्री जैन ने कहा है कि इस साल अब तक सैकड़ों बार प्लान मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती की जा चुकी है। पहले जहां मानसून पूर्व ऐसा किया जाता था, वहीं अब साल भर बिजली कटौती इस नाम पर की जाने लगी है। इस ओर राज्य सरकार का ध्यान न जाना इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करता है कि भाजपा को जनता की कोई फ़िक्र नहीं है।
स्मार्ट मीटर यानि जले पर नमक
पूर्व संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने स्मार्ट मीटर को उपभोक्ताओं के जले पर नमक करार देते हुए कहा है कि सरकार मोर बिजली एप के माध्यम से स्मार्ट मीटर का प्रचार कर रही है। उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में भाजपा सरकार ने जन आक्रोश के चलते जिस स्मार्ट मीटर को किनारे लगा दिया है, छत्तीसगढ़ में सरकार उसके प्रचार प्रसार में जुटी है। स्मार्ट मीटर से जनता को हो रही तकलीफ की तरफ ध्यान देने के बजाय राज्य सरकार अपने मित्र अडानी को खुश करने में लगी है।