
० नेत्र सहायक अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप
० तबादले के बाद भी जमे हुए हैं इसी अस्पताल में
जगदलपुर। महारानी जिला चिकित्सालय के एक कर्मचारी के संरक्षण में नेत्र स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। यहां 10 हजार रुपए प्रति लेंस मांगने एवं कॉन्टैक्ट लेंस व्यापार के आरोपों के बावजूद कार्रवाई लंबित है।
जिला चिकित्सालय महारानी अस्पताल जगदलपुर में पदस्थ नेत्र सहायक अधिकारी कन्नूर हनुमंत राव लंबे समय से विवादों एवं गंभीर शिकायतों के केंद्र में रहे हैं। शिकायतों के अनुसार जिला चिकित्सालय के सामने संचालित भवानी चश्मा दुकान के माध्यम से कॉन्टैक्ट लेंस के व्यापार तथा शासकीय कार्यों के समानांतर निजी हितों को बढ़ावा देने के आरोप लगातार उठते रहे हैं। विजय वार्ड निवासी राधाकृष्ण कुशवाहा द्वारा निःशुल्क आई.ओ.एल. लेंस प्रत्यारोपण के दौरान 10 हजार रुपए प्रति लेंस की मांग की जाने की शिकायत की गई थी। तत्कालीन नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अक्षय पाराशर द्वारा भी शासकीय आपूर्ति उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों से राशि मांगने को अनुचित बताया गया था। उक्त मामले में कोतवाली, जगदलपुर के समक्ष गवाहों के कथन दर्ज होने के बावजूद जांच आज तक लंबित है। शिकायतों के आधार पर प्रशासन द्वारा कन्नूर हनुमंत राव को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छप्पर भानपुरी स्थानांतरित किया गया तथा उनके स्थान पर शसंदीप प्रमाणिक को जिला चिकित्सालय में पदस्थ करने का आदेश जारी किया गया, किंतु आदेश जारी होने के बाद भी एक कर्मचारी विशेष को संरक्षण देने के आरोपों के बीच आज तक उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है। आरोप है कि एक कर्मचारी विशेष को जिला चिकित्सालय में बनाए रखने के लिए 40 से 100 किलोमीटर दूर ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थ नेत्र सहायक अधिकारियों की ड्यूटी जिला चिकित्सालय में लगाकर संपूर्ण ग्रामीण नेत्र स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित किया जा रहा है।कर्मचारी संगठनों द्वारा पूर्व में भी इस विषय पर आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है, किंतु जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण ग्रामीण मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। प्रश्न यह है कि जब शिकायतों, लंबित जांच और प्रशासनिक आदेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है, तब आखिर किसके संरक्षण में एक कर्मचारी विशेष के लिए पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को दांव पर लगाया जा रहा है? यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो इससे जनाक्रोश बढ़ना स्वाभाविक होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।