
० भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का कुत्सित प्रयास शुरू
जगदलपुर। बस्तर जिले के कुछ भ्रष्ट सरपंचों और सचिवों ने अब पत्रकारों को प्रताड़ित करने तथा अपने कारनामों पर पर्दा डालने का नया तरीका निकाल लिया है। ये लोग अब मैदानी पत्रकारों के खिलाफ एसपी और जिला पत्रकार संघ से झूठी शिकायतें करने लगे हैं।
अब अखबार से जुड़े एजेंटों और ग्रामीण संवाददाताओं को सरपंच संघ द्वारा पुलिस अधीक्षक को की गई शिकायत के बाद कार्य करना मुश्किल हो गया है। नक्सलमुक्त बस्तर में अपने भ्रष्टाचार को छुपाने पहले प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी सहित कुछ छुटभैये नेता ही सामने आते थे, किंतु अब सरपंच और उनके अन्य साथी जनप्रतिनिधि भी अपने कारनामे छुपाने बड़ी ढिठाई के साथ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दे रहे हैं। अगर ज्ञापन में सच्चाई है तो पुलिस विभाग जरूर कार्रवाई करे, किंतु अगर केवल अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने और मेहनतकश ग्रामीण पत्रकारों को सिर्फ टारगेट करने के उद्देश्य से शिकायत की गई है, तो झूठी शिकायत करने वाले सरपंचों पर भी कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। क्योंकि यह निष्पक्ष और कर्तव्यनिष्ठ ग्रामीण पत्रकारों के लिए यह बेहद चिंतनीय है मुद्दा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न विकासखंडों की ग्राम पंचायतों के ऐसे सचिव जो वर्षों से एक ही पंचायत में पदस्थ रह कर नौकरी की आड़ में राजनीति भी करते हैं। वे विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं और सांसद, विधायक के पिछलग्गू बनकर सरकार की योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार करते हैं। ऐसे ही कुछ बदनाम सचिवों ने मिलकर एक तथाकथित संघ के माध्यम से एसपी को ज्ञापन दिया है। सरपंच और सचिव का चोली दामन का साथ जग जाहिर है। ग्राम पंचायतों में सरपंचों से ज्यादा सचिवों का सिक्का चलता है। ऐसे सचिव सरपंचों के कम पढ़े लिखे होने का फायदा उठाते हुए दिलेरी के साथ भ्रष्टाचार कर रहे हैं। 15वें वित्त आयोग और अन्य मदों से मिलने वाली राशि की जिस कदर बंदरबांट होती है, वह किसी से छुपी नहीं है। बस्तर जिले में शायद ही ऎसी कोई पंचायत हो, जहां 15वें वित्त आयोग की राशि की हेराफेरी नहीं हुई हो। संगठित भ्रष्टाचार को छुपाने वे अब तथाकथित संघ का सहारा ले रहे हैं। अगर उनके आरोप में दम है तो संघ इस मामले को सार्वजनिक करे, और पूर्ण सबूत के साथ तथ्य पेश करे, नहीं तो केवल अपनी करनी छुपाने कुछ पत्रकारों पर आरोप लगाने से उनके कुत्सित प्रयास का जवाब जिले के चौथे स्तंभ के पत्रकार अवश्य देंगे।
बुधराम ने दी खुली चुनौती
सरपंच संघ द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बकावंड ब्लॉक निवासी पत्रकार बुधराम नेताम ने कहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार और तथ्यहीन हैं। उन्होंने सरपंच संघ के पदाधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई भी सरपंच यह साबित कर दे कि उन्होंने समाचार प्रकाशन, विज्ञापन या किसी अन्य नाम पर एक भी रुपये की वसूली की है, तो वे जेल जाने के लिए भी तैयार हैं। पत्रकार बुधराम नेताम ने कहा है कि कुछ लोगों द्वारा उन्हें “फर्जी पत्रकार” बताने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि उनकी पत्रकारिता से संबंधित सभी जानकारियां और दस्तावेज संबंधित विभागों में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग उन पर फर्जी पत्रकार होने का आरोप लगा रहे हैं, वे पहले जनसंपर्क कार्यालय जाकर उनकी स्थिति और पत्रकारिता संबंधी जानकारी की पुष्टि कर लें।उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े समाचार प्रकाशित होने के बाद कुछ लोग बौखलाहट में उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। पत्रकार का काम जनता की समस्याओं और जनहित के मुद्दों को सामने लाना है, और वे इसी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। बुधराम नेताम ने सरपंच संघ की निंदा करते हुए कहा कि बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि सरपंच संघ के पास उनके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक करें और संबंधित जांच एजेंसियों को सौंपें। यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो वे कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।उन्होंने कहा कि वे आगे भी क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाते रहेंगे तथा किसी भी दबाव या धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस बयान के बाद सरपंच संघ और पत्रकार के बीच चल रहा विवाद जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।