वन मंत्री केदार कश्यप की पहल ने आदिवासी महिलाओं के चेहरों लाई मुस्कान, बेचे 26 करोड़ के उत्पाद

० फेसपैक, टूथपेस्ट से लेकर आयुर्वेदिक दवाएं तक बना रही हैं माताएं
०  बस्तर व सभी वनांचलों की आदिवासी महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। अगर सरकार, मंत्री और विधायक दूरदर्शी हों, उनमें जनहित की भावना कूट कूट कर भरी हो, प्रजा कभी दुखी और अभावग्रस्त नहीं रह सकती। मंत्री और सरकार राह दिखाएं, संबल दें, तो जंगलों में रहने वाली आदिवासी महतारी भी सफलता का इतिहास रचने का माद्दा रखती है। छत्तीसगढ़ के जंगलों में वन संपदाओं का खजाना भरा पड़ा है। जरूरत इन संपदाओं के जरिए स्थानीय लोगों को आय का जरिया उपलब्ध कराने की है। ऐसा ही बड़ा नेक काम किया है छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने। उनकी पहल पर आदिवासी महिलाएं आज सफल उद्यमी के रूप में उभर कर सामने आई हैं।
सुशासन क्या होता है, इसे बस्तर, कोरबा, कटघोरा, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, कवर्धा, मानपुर, मोहला के जंगलों जाकर देखें। बस्तर और कटघोरा में तो आदिवासी महिलाएं नया इतिहास रचती दिखाई दे रही हैं।प्रदेश में वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने और आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग के डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सफल ग्रामीण उद्यमिता का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।12 आदिवासी महिलाओं का यह समूह कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था।सीमित आय और रोजगार के अभाव के बीच जीवन यापन करने वाली इन महिलाओं ने वन धन विकास केंद्र से जुड़कर अपने जीवन की दिशा ही बदल डाली है। वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड के सहयोग से महिलाओं को हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपजों का उपयोग करते हुए समूह ने त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर तथा हर्बल टूथ पाउडर जैसे उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई और समूह को बाजार में एक मजबूत पहचान मिली। समूह की उपलब्धियों को उस समय और मजबूती मिली जब आयुष विभाग से उन्हें बड़े पैमाने पर उत्पाद आपूर्ति का ऑर्डर प्राप्त हुआ। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपये का लाभ हुआ तथा नए बाजारों तक पहुंच का मार्ग प्रशस्त हुआ।

सालभर में कमाए 39 लाख
हरिबोल स्वयं सहायता समूह ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 38.90 लाख रुपये का लाभ एवं कमीशन अर्जित किया। इससे समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आया। वन धन विकास केंद्र डोंगनाला ने वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक लगभग 26.11 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री दर्ज कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन, महिलाओं की मेहनत और वन विभाग के सतत मार्गदर्शन का परिणाम है। इस पहल से समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।

ट्रायफेड से मिला सम्मान
हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए समूह को ट्रायफेड तथा राज्य स्तर पर विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। हरिबोल स्वयं सहायता समूह की यह सफलता दर्शाती है कि वन मंत्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन आधारित आजीविका, कौशल विकास और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। डोंगनाला की यह उपलब्धि आज प्रदेश के अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है और यह साबित करती है कि वन संपदा का वैज्ञानिक उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर सकता है।

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