० सरकार की छवि पर पड़ रहा है खराब असर
० अब बदली मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दौरान कई मंत्रियों के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारियों (ओएसडी) और निजी सहायकों (पीए) को उनके पदों से हटाया गया है। प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट, खराब तालमेल और अनैतिक कार्यों की शिकायतों के कारण यह कार्रवाई की गई है। कुछ जगहों पर भष्टाचार के मामलों के चलते उन पर गाज गिरी है। मगर इससे सरकार की ही छवि पर खराब असर पड़ने लगा है।
अब तक डिप्टी सीएम अरुण साव के ओएसडी विपुल कुमार गुप्ता को हटाकर उनकी जगह अजय कुमार त्रिपाठी को नया ओएसडी नियुक्त किया गया था। वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी सुनील तिवारी और जितेंद्र गुप्ता को हटाकर मूल विभाग में वापस भेजा गया था। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और कृषि मंत्री रामविचार नेताम के निजी स्टाफ को भी प्रशासनिक कारणों से बदला गया है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान मंत्रियों के निजी स्टाफ में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिला है। पिछले 25 महीनों में करीब 8 मंत्रियों के एक दर्जन से ज्यादा ओएसडी और पीए पदों से हटाए जा चुके हैं। इस सामूहिक रवानगी ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को भ्रष्टाचार और ‘पैसे के बंटवारे के विवाद से जोड़ रहा है। वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल प्रशासनिक सुधार और कामकाज की बेहतरी के लिए उठाया गया कदम बता रहा है। सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर रहे अधिकारियों और सहायकों को हटाने का सिलसिला लगातार जारी है। सामंजस्य की कमी और विभागीय सुस्ती बनी हटाने की मुख्य वजह। मंत्री केदार कश्यप के पीए सर्कषण सिंह को संविदा में गलत ढंग से नियुक्त किए जाने के कारण सामान्य प्रशासन विभाग ने इसी माह 5 मई को उनकी छुट्टी कर दी थी। तीन दिन पहले ही महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी रूही टेंभुलकर को हटा दिया गया। वे पंचायत विभाग मेें उपायुक्त पद पर थीं। उन्हें मूल विभााग में वापस भेजा गया है।
बताया जा रहा है कि मंत्रियों और उनके ओएसडी के बीच तालमेल ठीक नहीं था। कई मामलों में ओएसडी मंत्रियों के क्षेत्र और विभागीय कामकाज में वैसी सक्रियता नहीं दिखा रहे थे जैसी उनसे उम्मीद की जा रही थी। इसके अलावा भाजपा संगठन को भी कई माध्यमों से इन निजी सहायकों के व्यवहार और कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। माना जा रहा है कि मंत्रियों के काम को और अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए इन चेहरों को बदला गया है ताकि सरकार की छवि पर कोई आंच न आए। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के ओएसडी संजय मरकाम और अजय कन्नौजे को पद से हटाया गया। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के ओएसडी भागवत जायसवाल और पीए प्रवीण पांडेय की छुट्टी की गई। डिप्टी सीएम अरुण साव के ओएसडी विपुल गुप्ता को हटाया गया।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के ओएसडी दुर्गेश वर्मा, बी. रघु और पीए दुर्गेश धारे हटाए गए। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के ओएसडी संजय गजघाटे की सेवाएं समाप्त की गईं। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के ओएसडी तारकेश्वर देवांगन को हटाया गया। वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी सुनील तिवारी, जितेंद्र गुप्ता और तीर्थराज अग्रवाल को भी पद छोडऩा पड़ा। और अब महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की ओएसडी रूही टेंभुलकर को हटा दिया गया है।