0 तथाकथित पैरोकारों की बातें मनगढ़ंत,बेबुनियाद
जगदलपुर। अंजुमन ईस्लामिया एडहॉक कमेटी के सदर व अध्यक्ष डॉ. एस. जहीरूद्दीन ने कहा है कि हाल ही में कुछ व्यक्तियों द्वारा स्वयं को आम मुस्लिम समाज का प्रतिनिधि बताते हुए आयोजित प्रेस वार्ता एवं विभिन्न माध्यमों से प्रसारित बयानों में अंजुमन इस्लामिया एडहॉक कमेटी, जगदलपुर तथा छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के संबंध में अनेक भ्रामक, तथ्यहीन एवं विधिक रूप से असत्य आरोप लगाए गए हैं। उक्त परिस्थितियों में वास्तविक तथ्यों को समाज एवं जनसामान्य के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक हो गया है।डॉ. जहीरूद्दीन ने कहा कि पत्रकार वार्ता हेतु समाज की ओर से प्रतिनिधित्व करने हेतु समाज द्वारा तथाकथित आम मुस्लिम जमात के पैरोकारों को अधिकृत नहीं किया गया था। इनमें से एक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अनुषांगिक संगठन भारतीय युवा कांग्रेस का तत्कालीन राष्ट्रीय प्रवक्ता है और दुसरा आप पार्टी के सदस्य हैं और तीसरा एनएसयूआई के तत्कालीन सदस्य हैं। एक किरदार और हैं, जो तीन दुकानें किराये पर लिए हुए हैं। इन लोगों ने अपने निजी स्वार्थ वश प्रेस वार्ता की है। ऐसा प्रतीत होता है कि ये लोग राजनीतिक मंशा से यह कार्य कर रहें हैं। डॉ. जहीरुद्दीन के मुताबिक उक्त पैरोकारों के एक -एक दावे दिग्भ्रमित करने वाले हैं अतः वास्तविक बातों को सामने रखना अंजुमन इस्लामिया कमेटी की जिम्मेदारी व जवाबदेही है। जहीरूद्दीन ने आगे कहा कि तथाकथित पैरोकारों की बातों के दावे तर्कसंगत नहीं हैं। कमेटी पैरोकारों की बातों का खंडन करती है। एडहॉक कमेटी का गठन पूर्णतः वैधानिक एवं विधिसम्मत है। कमेटी का गठन राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए विधि सम्मत ढंग से किया गया है। अतः कमेटी द्वारा किया जा रहा समस्त प्रशासनिक एवं संस्थागत कार्य पूर्णतः वैध एवं अधिकृत है। किसी वैधानिक रूप से गठित समिति को बंधक समिति कहना न केवल भ्रामक एवं गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य है, बल्कि यह वक्फ बोर्ड जैसी संवैधानिक संस्था की गरिमा एवं अधिकार क्षेत्र पर भी अनावश्यक प्रश्नचिन्ह लगाने का प्रयास है। डॉ जहीरूद्दीन ने आगे बताया कि एडहॉक कमेटी को प्रारंभिक रूप से सीमित अवधि हेतु दायित्व सौंपा गया था, किंतु कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत यह पाया गया कि पूर्व कमेटियों द्वारा आवश्यक अभिलेख एवं वित्तीय दस्तावेज विधिवत हस्तांतरित नहीं किए गए। विशेष रूप से कैश बुक, बिल-वाउचर रसीद बुक लेखा विवरण, बैंकिंग अभिलेख, वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। ऐसी स्थिति में बिना अभिलेखों के किसी भी चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संस्था के हित, विधिक प्रक्रिया एवं पारदर्शिता तीनों के प्रतिकूल होता। इसी कारण जांच एवं दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। आज भी दस्तावेज नहीं दिये गये जिससे कमेटी का कार्य प्रभावित हो रहा है। राज्य वक्फ बार्ड द्वारा दस्तावेज प्राप्त करने हेतु कार्यवाही की जा रही है। कलेक्टर द्वारा पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच लंबित रहते हुए एवं अभिलेख अधूरे होने की स्थिति में चुनाव प्रक्रिया को तत्काल संपन्न करना विधिक दृष्टि से उचित नहीं माना गया। दस्तावेज जांच में नहीं देने पर अभी जांच प्रभावित है। तत्कालीन जांच कमेटी द्वारा 3 साल 8 महीने में करोड़ों का लेन-देन नगद में किया गया है जो कि वितिय अनियमितता की श्रेणी में आता है। पूर्व कमेटी के सदर सलीम रजा द्वारा अंजुमन कमेटी की राशि 3 करोड़ 58 लाख गबन करने के फलस्वरूप एफआईआर दर्ज हुई थी और प्रकरण न्यायालय में लंबित है। यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व कमेटियों से संबंधित कुछ गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक शिकायतें वर्तमान में न्यायालयीन एवं जांच स्तर पर विचाराधीन हैं। ऐसे समय केवल चुनाव का मुद्दा उठाकर मूल शिकायतों एवं जवाबदेही के प्रश्नों से ध्यान हटाने का प्रयास किया जाना संदेह उत्पन्न करता है। यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि पूर्व कमेटियों से जुड़े कुछ मामलों में न्यायालयीन प्रक्रिया प्रचलित है तथा संबंधित विषयों पर जांच एवं कानूनी कार्यवाही जारी है। ऐसी स्थिति में लगातार प्रेसवार्ता, जनभावनाओं को प्रभावित करने वाले बयान एवं अपूर्ण तथ्यों का सार्वजनिक प्रसारण न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। डॉ. जहीरुद्दीन ने कहा है कि छग राज्य वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज से संबंधित जो वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित किया जा रहा है, उसके संबंध में यह जानकारी प्राप्त हुई है कि उक्त वीडियो को कथित रूप से कांट-छांट कर अधूरा एवं भ्रामक रूप में प्रस्तुत किया गया। यदि किसी व्यक्ति के बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत कर समाज में तनाव, भ्रम अथवा वैमनस्य उत्पन्न करने का प्रयास किया जाता है तो यह गंभीर विधिक विषय है।उन्होंने कहा कि वर्तमान एडहॉक कमेटी का उद्देश्य किसी पद पर बने रहना नहीं है बल्कि संस्था की प्रशासनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना, वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा करना, लंबित अभिलेख प्राप्त करना, संस्थागत जवाबदेही स्थापित करना तथा विधिसम्मत प्रक्रिया के अंतर्गत चुनाव सुनिश्चित करना है। वर्तमान परिस्थितियों में जबकि वित्तीय अभिलेखों का सत्यापन लंबित है, जांच समिति कार्यरत है, पूर्व वित्तीय मामलों की समीक्षा जारी है, तथा वक्फ संपत्तियों से जुड़े विषय परीक्षणाधीन हैं, ऐसे समय संस्था में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से एडहॉक कमेटी वर्तमान में व्यवस्था संचालन कर रही है, ताकि संस्था की संपत्तियों, दस्तावेजों एवं प्रशासनिक संरचना को सुरक्षित रखा जा सके। संस्था की संपत्तियों एवं अभिलेखों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, तथा समाजहित एवं पारदर्शिता के साथ कार्य किया जा रहा है।बॉक्ससमाज से कमेटी की अपीलअंजुमन इस्लामिया एडहॉक कमेटी ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे अपुष्ट आरोपों, भ्रामक बयानों एवं अफवाहों पर विश्वास न करें तथा सामाजिक सौहार्द, भाईचारा, शांति एवं संस्थागत मर्यादा बनाए रखें। समाज एवं संस्था दोनों के हित में यह आवश्यक है कि जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष रूप से पूर्ण होने दिया जाए तथा विधिसम्मत प्रक्रिया का सम्मान किया जाए। डॉ. सलीम राज ने भी अंजुमन एडहॉक कमेटी कि तारीफ की है कि इनके द्वारा खाता खुलवा कर केशलेस अंजुमन बनाया गया जो कि छत्तीसगढ़ का पहला अंजुमन है। मुस्लिम समाज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, डॉ. सलीम राज एवं विधायक किरण देव सिंह का आभार प्रकट करता है और सहयोग की अपेक्षा करता है।