
0 अबूझमाड़ तक फैला है मतांतरण का जाल
0 घर वापसी पर हुआ धूमधाम से स्वागत
(अर्जुन झा)जगदलपुर। नक्सली आतंक से मुक्त बस्तर के आदिवासी अब मतांतरण के भी कुचक्र से बाहर निकलते जा रहे हैं। मनो वैज्ञानिक तरीके से ब्रेनवाश कर धर्मांतरित किए गए आदिवासी तेजी से अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। ऐसे ही एक घटनाक्रम में अबूझमाड़ जैसे दुरूह और अति संवेदनशील क्षेत्र के आठ आदिवासी परिवार अपने मूल धर्म में लौट आए हैं।
बस्तर संभाग में अबूझमाड़ वह क्षेत्र है, जहां के कई गांवों में अफसरों और जनप्रतिनिधि के तक कदम नहीं पड़ पाए हैं। वहां एक तो नक्सली काबिज रहे हैं और दूसरे मतांतरण कराने वाले लोग। ये लोग सेवा, ईलाज आदि के नाम पर भोले भाले आदिवासियों का ब्रेनवाश कर उन्हें अपने समाज व धर्म में शामिल करते आए हैं। कथित चंगाई सभाओं में बीमारियां ठीक करने का दावा करते हुए हजारों आदिवासियों काकन्वर्जन करा लिया गया है। लेकिन अब बयार उलटी बहने लगी है। कन्वर्ट हो चुके आदिवासियों का उस मायाजाल से मोहभंग होता जा रहा है और वे फिर अपनी जड़ों से जुड़ने लगे हैं। बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के 84 परगना छोटेडोंगर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटनाक्रम सामने आया है। 11 मई को ग्राम धनोरा और ग्राम जम्हरी के आठ आदिवासी परिवारों ने ईसाई धर्म त्याग कर पुनः अपने मूल धर्म और आदिवासी संस्कृति को अपना लिया है। ग्राम पंचायत धनोरा में आयोजित एक सामाजिक बैठक में समाज के वरिष्ठों, मांझी, मुखियाओं और ग्रामीणों की उपस्थिति में इन परिवारों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। पारंपरिक पूजा-पाठ और सामाजिक विधि-विधान के साथ शुद्धिकरण कर उन्हें आदिवासी समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल किया गया।
बीमारी बनी थी वजह
मूल धर्म में लौटने वालों में लक्ष्मीनाथ उसेंडी, मसी उसेंडी, रामदई उसेंडी और रुचि उसेंडी जैसे नाम प्रमुख हैं। रामदई उसेंडी ने बताया कि वर्षों पहले परिवार में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे मिशनरी प्रार्थना सभाओं और ‘चंगाई कार्यक्रमों’ जाने लगी थीं। वहां प्रार्थना से बीमारियां ठीक होने का दावा किया गया था। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेता गायता प्रदीप उसेंडी और राकेश उसेंडी ने इस वापसी को धर्म स्वतंत्रता विधेयक और समाज में बढ़ती जागरूकता का परिणाम बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूर-दराज के इलाकों में अशिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का लाभ उठाकर बाहरी तत्व ग्रामीणों को भ्रमित करते हैं। वर्तमान में, अबुझमाड़ क्षेत्र में धर्मांतरण एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, जिसे रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।