अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा के अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं : जग्गूराम तेलामी

० ग्रामसभा के फैसले पर तहसीलदार के नोटिस से भड़का आदिवासी समाज 
बीजापुर। भोपालपटनम विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोटाईगुड़ा में ग्रामसभा द्वारा सामुदायिक उपयोग की भूमि संरक्षण संबंधी लिए गए निर्णय के बाद पंचायत सचिव एवं पटेल को तहसीलदार कार्यालय द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर सर्व आदिवासी समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है।
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने जारी बयान में कहा है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को संविधान की पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून के तहत विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामसभा द्वारा पारित प्रस्ताव और सामुदायिक हित में लिए गए निर्णयों की अनदेखी करना आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।जग्गूराम तेलामी ने कहा कि ग्राम गोटाईगुड़ा की संबंधित भूमि को पूर्व से ही सामाजिक भवन, पारंपरिक कार्यक्रमों एवं सामुदायिक आयोजनों के लिए ग्रामसभा द्वारा संरक्षित रखा गया है। ऐसे में ग्रामसभा की सहमति के बिना भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू करना स्थानीय परंपराओं और संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि ग्रामसभा द्वारा अपनी बात रखने और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देने को शासकीय कार्य में बाधा बताकर नोटिस जारी करना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासन को अनुसूचित क्षेत्रों में कार्य करते समय स्थानीय समुदायों की भावनाओं एवं अधिकारों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए।
जिला अध्यक्ष जग्गूराम तेलामी ने मांग की है कि जारी नोटिस को तत्काल वापस लिया जाए तथा भविष्य में अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी भूमि आवंटन अथवा विकास कार्य से पूर्व ग्रामसभा की सहमति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रामसभा के अधिकारों की अनदेखी जारी रही तो सर्व आदिवासी समाज व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

क्या है मामला?

मामला भोपालपटनम के ग्राम गोटाईगुड़ा की भूमि खसरा नंबर 61/12 से 0.400 हेक्टेयर भूमि के आवंटन से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार जिला खेल अधिकारी द्वारा जिला एवं विकासखंड मुख्यालय में कार्यालय संचालन एवं विभागीय गतिविधियों के लिए उक्त भूमि आबंटन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र और ग्राम पंचायत प्रस्ताव मांगा गया था। इस पर ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, पटेल और माटी पुजारी ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि संबंधित भूमि को पूर्व से ही आदिवासी सामाजिक भवन एवं शादी-विवाह जैसे सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए ग्रामसभा द्वारा संरक्षित किया गया है। इसके बाद आयोजित ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित कर भूमि आवंटन संबंधी आदेश को निरस्त करने की मांग की गई।
तहसीलदार कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत द्वारा संविधान की पांचवीं अनुसूची तथा छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) नियम 2022 के प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रशासनिक आदेश का विरोध किया गया, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित हुआ। प्रशासन ने इसे शासकीय कार्य में बाधा मानते हुए संबंधित पंचायत पदाधिकारियों से दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जारी नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

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