लाजवाब और सेहत के लिए मुफीद है बस्तर की कोलियारी भाजी

0  बस्तर के बाजारों में आई कोलियारी की बहार 
(अर्जुन झा) जगदलपुर। बस्तर के जंगलों में एक ऎसी भाजी पाई जाती है, जो कई रोगों को दूर करने की क्षमता रखती है। आजकल बस्तर के बाजारों में इस भाजी की बहार आई हुई है। इसे खरीदने के लिए हर वर्ग के लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
रोग विनाशक इस भाजी का नाम है कोलियारी भाजी। इसे कचनार और कोइलार के नाम से भी जाना जाता है। कोलियारी भाजी आम भाजियों की तरह छोटे पौधों या लताओं पर नहीं मिलती, बल्कि पेड़ पर मिलती है। यह भाजी मुख्य रूप से पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, ब्लड शुगर और बीपी को नियंत्रित करने, बवासीर में राहत देने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बेहद फायदेमंद मानी जाती है। पेट संबंधी रोगों में तो इसे रामबाण औषधि माना जाता है। इसकी सब्जी बनाकर खाने से दस्त और अपच में बड़ी राहत मिलती है। यह भाजी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। कोलियरी भाजी की सब्जी बनाने का तरीका बहुत ही आसान है। इसमें न तो ज्यादा तेल की जरूरत पड़ती है, न ज्यादा मिर्च मसालों की। जरा से तेल में सूखी मिर्च का तड़का देकर उबाली गई कोलियारी भाजी को डाल दिया जाता है। हल्की खटास लाने के लिए इमली का इस्तेमाल किया जाता है और सिर्फ दस मिनट में ही स्वादिष्ट एवं सेहत के लिए फायदेमंद सब्जी तैयार। कोलियरी भाजी में उच्च फाइबर होने के कारण यह पेट के कीड़ों को खत्म करने और कब्ज-गैस से राहत दिलाने में सहायक है।

सेठिया की मंत्री कश्यप से अपील
कोलियारी भाजी के जानकर भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य महेंद्र सेठिया बताते हैं कि यह भाजी शुगर और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है। बवासीर की समस्या को कम करने और पेट व शरीर की सूजन को कम करने में भी फायदेमंद है। यह भाजी खून से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में भी सहायक है। श्री सेठिया ने बताया कि कोलियारी भाजी आमतौर पर गर्मियों में मिलती है और इसे बस्तर में बहुत पसंद किया जाता है।गर्मियों में सिर्फ 2 महीने आने वाली यह भाजी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। आमतौर पर यह जंगली इलाकों में मिलती है इसे अलग-अलग तरीके से बनाया जाता है। यह कफ को कम करने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकलने में भी मदद करती है। किसान नेता महेंद्र सेठिया ने छत्तीसगढ़ शासन के वन मंत्री केदार कश्यप से कोलियारी भाजी के पेड़ पौधों को संरक्षित करने और इसका पेटेंट कराने का आग्रह किया है।

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