बस्तर। “सेवा, शिक्षा और संगठन” के मंत्र को जीवन का आधार बनाने वाले धाकड़ समाज के वरिष्ठ समाजसेवी, मार्गदर्शक और स्तंभ स्व. मंकुद सिंह ठाकुर के निधन से पूरे धाकड़ समाज में शोक की लहर है। समाज सुधार और एकता के लिए समर्पित उनका निस्वार्थ जीवन आने वाली कई पीढ़ियों के लिए प्रकाश स्तंभ का कार्य करेगा। उनके न रहने से समाज ने एक सच्चा हितचिंतक और अभिभावक खो दिया है।
जब संसाधन नहीं, सिर्फ संकल्प था साथ
स्व.ठाकुर साहब का जीवन किसी प्रेरणा से कम नहीं था। 70 और 80 के दशक में जब आवागमन के साधन न के बराबर थे और समाज कई कुरीतियों में जकड़ा हुआ था, तब उन्होंने अकेले ही परिवर्तन की मशाल थामी। साइकिल से और कई बार पैदल ही गांव-गांव, घर-घर जाकर उन्होंने लोगों को जोड़ा। न उनके पास सरकारी फंड था, न कोई बड़ी संस्था का सहारा। था तो सिर्फ समाज को एकजुट और सशक्त देखने का जुनून।
उन्होंने बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशाखोरी जैसी कुरीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। सामाजिक पंचायतों के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों पारिवारिक विवादों को कोर्ट-कचहरी से बाहर ही प्रेम और न्याय से सुलझाया। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि आज धाकड़ समाज एक मजबूत और संगठित इकाई के रूप में जाना जाता है। उनका दिया नारा “संगठित समाज, सशक्त समाज” आज हर धाकड़ परिवार की जुबान पर है।
अंतिम विदाई: नम आंखों से दी श्रद्धांजलि, परिवार का बढ़ाया हौसला
शुक्रवार को धाकड़ समाज कल्याण समिति 10281 के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल स्व. मंकुद सिंह ठाकुर के निवास पहुंचा और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रतिनिधिमंडल में जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष तुलाराम ठाकुर, पुरन ठाकुर, बद्रीनाथ ठाकुर, सचिव राजूराम ठाकुर, ओमप्रकाश ठाकुर सहित बड़ी संख्या में समाज के सदस्य शामिल थे। सभी ने स्व. मंकुद सिंह ठाकुर के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया।
समाज ने निभाया धर्म: पत्नी को दिया आर्थिक सहयोग
श्रद्धांजलि सभा के दौरान धाकड़ समाज कल्याण समिति बस्तर की ओर से एक अनुकरणीय पहल की गई। समिति के पदाधिकारियों ने स्व. मंकुद सिंह ठाकुर की धर्मपत्नी को श्रद्धांजलि स्वरूप आर्थिक सहयोग की राशि भेंट की। समिति ने स्पष्ट किया कि स्व. ठाकुर ने अपना पूरा जीवन समाज को दिया, ऐसे में उनके परिवार का ध्यान रखना पूरे समाज का दायित्व है।
जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ठाकुर ने भावुक होते हुए कहा, “स्व मंकुद सिंह ठाकुर ने बिना किसी सरकारी मदद या बड़े संसाधन के जो समाज सेवा का पौधा लगाया था, आज वो वटवृक्ष बन चुका है। हम उनके परिवार के साथ हर सुख-दुख में खड़े हैं। उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
एक युग का अंत, एक विचार की शुरुआत
स्व. मंकुद सिंह ठाकुर का पार्थिव शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन उनके विचार, उनके आदर्श और उनके द्वारा शुरू किए गए सेवा कार्य अमर रहेंगे। उन्होंने साबित कर दिया कि समाज बदलने के लिए बड़े पद या पैसे की नहीं, बड़े दिल और नेक इरादों की जरूरत होती है।धाकड़ समाज आज संकल्प लेता है कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करेगा और “सेवा, शिक्षा और संगठन” के उनके मार्ग पर चलकर समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।