नक्सलमुक्त होने की राह पर गोगुंड़ा गांव…29 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण 

0 40 साल से नक्सलियों का राज चल रहा था यहां 

(अर्जुन झा)जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले का सबसे संवेदनशील और पिछले चार दशकों से नक्सलियों का गढ़ बना रहा गोगुंड़ा गांव अब नक्सल मुक्ति की राह पर तेजी से अग्रसर हो रहा है। इस गांव और आसपास के गांवों के 29 नक्सलियों ने आज आत्मसमर्पण कर गोगुंड़ा गांव के नक्सल मुक्त होने का रास्ता साफ कर दिया। कोंटा एरिया कमेटी सचिव मंगडू की मौत के बाद गोगुंड़ा गांव और आसपास इलाके में सक्रिय रहे 29 नक्सली आज 14 जनवरी को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ गए। 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही नक्सल संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है। जहां एक ओर एंटी नक्सल आपरेशन में नक्सली मारे जा रहे हैं, वहीं दूसरी और केंद्र एवं राज्य सरकारों की योजनाओं तथा छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पुष्टि करते हुए कहा कि सुकमा जिला तेजी से माओवादमुक्ति की ओर बढ़ रहा है। जो माओवादी अभी भी शेष हैं, उनसे अपील है कि वे आत्म समर्पण कर शासन की योजनाओं का लाभ लें और देश, राज्य तथा बस्तर के विकास में भागीदार बनें। आज जिन नक्सलियों ने सरेंडर किया है वे केरलापाल इलाके में सक्रिय रहे हैं।

इन्होंने किया सरेंडर
बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गोगुंड़ा गांव के 29 नक्सली आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा से जुड़ने के लिए पहुंचे। जहां पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और सीआरपीएफ अधिकारी हिमांशु लोहानी के समक्ष उन्होंने आत्मसमर्पण किया। जिसमें पोड़ियामी बुधरा दो लाख का इनामी, हेमला मंगडू, मड़कम हिड़मा, हेमला हिड़मा, माड़वी देवा, हेमला नंदा, मड़कम बुधरा, मुचाकी सोमा, मुचाकी गुट्टा, पोड़ियामी देवा, मुचाकी बुधरा, पोड़ियामी सोमड़ा, मुचाकी मुड़ा, सोढ़ी देवा, मुचाकि हिड़मा, वेट्टी देवा, मुचाकि नंदा, माड़वी राजा, पोड़ियामी बुधरी, सोड़ी नंदा, मड़कम कोसा, सोढ़ी बुधरा, मुचाकी आयता, मुचाकी नंदा, मुचाकी मुका, माड़वी सुक्का, माड़वी देवा, मुचाकी हिड़मा, मुचाकी लक्मा ने आत्म समर्पण किया। सभी आत्म समर्पण को सहयोग राशि के अलावा शासन की योजना का लाभ दिया जाऐगा। इस दौरान आईपीएस एएसपी रोहित शाह, मनीष रात्रे समेत पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारी मौजूद रहे।

पहाड़ की चोटी पर है गोगुंड़ा गांव
गोगुंड़ा गांव की भागौलिक स्थिति बेहद जटिल है। इस गांव पर चार दशकों नक्सली काबिज रहे हैं। जिले का सबसे अति संवेदनशील गांव गोगुंड़ा पूरी तरह पहाड़ पर बसा हुआ है। आपरेशन करने के लिए जवानों को खड़ी पहाड़ी पर करीब 8 किमी. पैदल चलना पड़ता था। घने जंगल और उंची पहाड़ की चोटी माओवादियों के लिए सेफ जोन हुआ करती थी। लेकिन दो माह पहले पुलिस और सुरक्षा बलों ने वहां नया कैंप खोल दिया है और पहाड़ को काटकर एक सड़क भी बना ली गई है। जिसके बाद यहं छुपे माओवादी भागने लगे। कुछ दिन पहले इसी गांव का रहने वाला कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू मुठभेड़ में मारा गया था। वहीं पिछले दो माह से लगातार प्रशासन वहां पहुंच रहा है। कलेक्टर अमित कुमार और एसपी किरण चव्हाण पूरी टीम के साथ वहां पहुंचे थे। जिसके बाद ग्रामीण भी प्रभावित हुए और माओवाद संगठन के लिए स्थानीय स्तर में काम करने वालों ने आत्म समर्पण किया।

कम हो जाएगी माओवादी गतिविधि
जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा लगातार कैंप खोले जा रहे हैं और आपरेशन चलाए जा रहे हैं, जिसके कारण माओवादी संगठन पर दबाव बना है। 29 माओवादी गांव में स्थानीय स्तर पर काम करने वाले 29 माओ वादियों ने शासन की योजनाओं से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है। आने वाले समय में उस इलाके में माओवाद गतिविधि कम हो जाएगी।
-किरण चव्हाण,
एसपी सुकमा

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