पोटियावंड–मोतीगांव मार्ग का पुल ढहा, मुश्किलों में फंसे ग्रामीण

0 2 किमी की दूरी हो गई अब 7 किलोमीटर लंबी 
0 पुल गिरने के बाद झांकने तक नहीं आए हैं अधिकारी
(अर्जुन झा) बकावंड। विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत पोटियावंड और मोतीगांव को जोड़ने वाला मुख्य पुल ढह जाने से क्षेत्र में आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से दोनों पंचायतों का आपसी संपर्क टूट गया है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दोनों गांवों के बीच की दूरी अब बढ़कर 7 किलोमीटर लंबी हो गई है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह पुल क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का एकमात्र और सबसे छोटा मार्ग था। पुल गिरने से अब ग्रामीणों को जहां पहले मात्र 2 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती थी, वहीं अब 6 से 7 किलोमीटर लंबा रास्ता घूमकर जाना पड़ रहा है।इससे समय और खर्च दोनों में बढ़ोत्तरी हो गई है। पुल गिरने का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों, गर्भवती महिलाओं और बीमार मरीजों पर पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल पहुंचने में देरी हो रही है, वहीं मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाने में कठिनाई हो रही है। किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और साधन लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पुल की हालत लंबे समय से जर्जर थी, जिसकी शिकायत कई बार संबंधित विभाग और पंचायत स्तर पर की गई थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा अब ग्रामीण भुगत रहे हैं। ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि पुल गिरने के बाद भी अब तक न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा है और न ही वैकल्पिक मार्ग या अस्थायी पुल की व्यवस्था की गई है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है, खासकर बरसात के मौसम में। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल निरीक्षण कर पुल निर्माण अथवा अस्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। पोटियावंड मोतीगांव के बीच गिरा यह पुल सिर्फ एक निर्माण ढांचे के टूटने का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बन गया है।

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