सुकमा। लाल आतंक के खिलाफ छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों की मुहिम रंग ला रही है। सुकमा जिले में बुधवार को एक ऐतिहासिक घटना में 50 लाख रुपये के इनामी 27 नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें दो हार्डकोर नक्सली और पीएलजीए बटालियन नंबर-1 के सदस्य शामिल हैं। यह नक्सली संगठन के लिए एक और बड़ा झटका है, जो पहले ही सोनू दादा समेत 60 नक्सलियों के सरेंडर से हिल चुका है।
छत्तीसगढ़ सरकार की नियद नेल्ला नार योजना और नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर 10 महिलाओं सहित इन 27 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पित नक्सलियों में एक सीवायसीएम सदस्य, 15 पार्टी सदस्य और 11 अग्र संगठन के सदस्य शामिल हैं।
इनामी नक्सलियों का विवरण
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल 50 लाख रुपये का इनाम था। इनमें शामिल हैं:
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ओयाम लखमू (53 वर्ष, दोरला, बुर्कलंका, इनाम: 10 लाख रुपये)
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माड़वी भीमा उर्फ तामो भीमा (18 वर्ष, मुरिया, करकापारा, इनाम: 8 लाख रुपये)
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सुनिता उर्फ कवासी सोमड़ी (24 वर्ष, मुरिया, काउरगट्टा, इनाम: 8 लाख रुपये)
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सोड़ी मासे (22 वर्ष, मुरिया, गुण्डराजगुड़ा, इनाम: 8 लाख रुपये)
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मुचाकी हड़मा (30 वर्ष, मुरिया, गोगुण्डा, इनाम: 3 लाख रुपये)
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सोड़ी दुला (40 वर्ष, मुरिया, कामावरम, इनाम: 2 लाख रुपये)
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कुहरम बुधरा उर्फ पदाम बुधरा (31 वर्ष, मुरिया, जिनेतोंग, इनाम: 2 लाख रुपये)
अन्य नक्सलियों पर 1-1 लाख रुपये का इनाम था, जिनमें विद्या, मड़कम हड़मे, माड़वी देवे, रोहन, वेट्टी कोसी, और मड़कम सुनिता जैसे नाम शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ चल रही जंग में एक बड़ी जीत है। आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत प्रति व्यक्ति 50,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक सौंपे गए। यह कदम न केवल नक्सली संगठनों को कमजोर करेगा, बल्कि क्षेत्र में शांति और विकास के नए रास्ते भी खोलेगा।