
जगदलपुर। सुकमा वनमंडल में तेंदूपत्ता प्रोत्साहन पारिश्रमिक में बड़े पैमाने पर घोटाले का पर्दाफाश करते हुए एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने 7 समिति प्रबंधकों और 4 वनकर्मियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से सभी 11 आरोपियों को जेल भेज दिया गया। यह बस्तर संभाग में अब तक की सबसे बड़ी भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई मानी जा रही है।
इस घोटाले में गरीब आदिवासियों को मिलने वाली लगभग 5 करोड़ रुपये की बोनस राशि में घालमेल कर भारी अनियमितता की गई थी। मामले की जांच के बाद एसीबी ने पूर्व में ही सुकमा के तत्कालीन डीएफओ अशोक पटेल को भी दोषी मानते हुए जेल भेज दिया है।
मुख्य सरगना संजय रेड्डी फरार
सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले का मुख्य सरगना, किस्टाराम समिति का प्रबंधक संजय रेड्डी, एसीबी की कार्रवाई की भनक लगते ही फरार हो गया। संजय रेड्डी को पूर्व आबकारी मंत्री का करीबी माना जाता है। खबर है कि वह किसी अन्य राज्य में अपने ‘आका’ के ठिकानों पर छिपा हुआ है। एसीबी की टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।
इसी प्रकार, फुलबगड़ी समिति का प्रबंधक इलाज के नाम पर बाहर होने के कारण और सुकमा समिति का प्रबंधक गिरफ्तारी से बच निकला है। फिलहाल 11 समिति प्रबंधकों पर 34 हजार गरीब आदिवासियों की लगभग 5 करोड़ से अधिक की राशि गबन करने का आरोप है।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि विष्णुदेव साय सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा तेंदूपत्ता बोनस राशि में घोटाले के दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। जांच जारी है और जो भी इसमें शामिल पाया जाएगा, उसे जेल भेजा जाएगा।