#NaxalFreeBastar Archives - statemediaservice.com https://statemediaservice.com/tag/naxalfreebastar/ सत्य पर प्रकाश Wed, 25 Mar 2026 12:55:45 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://statemediaservice.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-new-logo-2021-32x32.jpg #NaxalFreeBastar Archives - statemediaservice.com https://statemediaservice.com/tag/naxalfreebastar/ 32 32 214855051 नियत समय में खत्म हो रहा है नक्सलवाद : गृहमंत्री विजय शर्मा https://statemediaservice.com/2026/03/25/87347/ https://statemediaservice.com/2026/03/25/87347/#respond Wed, 25 Mar 2026 12:55:45 +0000 https://statemediaservice.com/?p=87347 0  जंगल से पुनर्वास हो सकता है तो जेल से क्यों नहीं : शर्मा  0 पापाराव ने 18 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर  जगदलपुर। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 50…

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0  जंगल से पुनर्वास हो सकता है तो जेल से क्यों नहीं : शर्मा 
0 पापाराव ने 18 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर 
जगदलपुर। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 50 लाख के कुख्यात नक्सली पापाराव ने अपने 18 साथियों के साथ बुधवार दोपहर जगदलपुर पुलिस लाइन के शौर्य भवन में विधिवत आत्मसमर्पण कर दिया। जो नक्सली अब तक गीता- रामायण जलाते रहे हैं उन्हें समाज प्रमुखों ने संविधान की किताब भेंट कर समाज की मुख्यधारा में लौटने पर उनका स्वागत किया।

इस मौके पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त 2024 में कहा था कि 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त हो जाएगा और यह नियत समय में खत्म हो रहा है। शहरी नेटवर्क पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई कोई हैप्पी बर्थडे पार्टी नहीं है। अभी भी एहतियात बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब जंगल से पुनर्वास हो सकता है तो जेल से भी पुनर्वास हो सकता है। जो नक्सली जेल में बंद है, वह रिहा होने के बाद दोबारा शास्त्र नहीं उठाएंगे, चूंकि अब तक ऐसा एक भी उदाहरण छत्तीसगढ़ में सामने नहीं आया है। श्री शर्मा ने कहा कि पुनर्वास से पुनर्जीवन छत्तीसगढ़ सरकार चाहती है। पापाराव ने 8 एके 47, एक एसएलआर और एक इंसास रायफल के साथ आत्मसमर्पण किया है। हालांकि उसने मंगलवार शाम को ही बीजापुर जिले के फरसेगढ़ में पुलिस के सामने हथियार डाल दिया था। इन सभी को भारी सुरक्षा के बीच जगदलपुर लाया गया था। बुधवार दोपहर पुलिस ने आत्म समर्पित नक्सलियों को मीडिया के सामने पेश किया। उधर शौर्य भवन में मीडिया से रूबरू होते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि परिवार,पंचायत, प्रतिनिधि और पत्रकारों के प्रयास से ही बस्तर नक्सल मुक्त हुआ है। छत्तीसगढ़ से सशस्त्र नक्सली खत्म होने की कगार पर हैं। छत्तीसगढ़ का 95 प्रतिशत हिस्सा नक्सली हिंसा से मुक्त हो चुका है। जेल में जो नक्सली बंद है। वह बेगुनाह नहीं है इसलिए उन्हें छोड़ने की बात कहना गलत है। पुलिस ने किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की। आरोप सिद्ध होने पर ही इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 3000 नक्सलियों का पुनर्वास हो चुका है। 2000 से ज्यादा नक्सलों की गिरफ्तारी हुई है और 525 नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस मौके पर प्रदेश के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तथा स्थानीय विधायक किरण सिंह देव, बेवरेज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम, एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद, बस्तर के आईजी सुंदरराज पी. के अलावा बस्तर संभाग के सातों जिला के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

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नक्सली पापाराव के बाद नेतृत्व विहीन हो गई दंडाकारण्य सब जोनल कमेटी https://statemediaservice.com/2026/03/25/87318/ https://statemediaservice.com/2026/03/25/87318/#respond Wed, 25 Mar 2026 06:54:57 +0000 https://statemediaservice.com/?p=87318 ० 18 नक्सलियों के सामूहिक सरेंडर करने से माओवाद को झटका  जगदलपुर। नक्सल संगठन दंडाकारण्य सब जोनल कमेटी सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापाराव का 17 अन्य…

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० 18 नक्सलियों के सामूहिक सरेंडर करने से माओवाद को झटका 
जगदलपुर। नक्सल संगठन दंडाकारण्य सब जोनल कमेटी सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापाराव का 17 अन्य नक्सलियों के साथ आत्मसमर्पण क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के पुलिस और सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों में एक निर्णायक सफलता का प्रतीक है।
नक्सली संगठन दंडकारण्य सब जोनल कमेटी सदस्य पापा राव, डीवीसीएम प्रकाश मड़वी डीवीसीएम अनिल ताती सहित कुल 18 नक्सलियों का यह समूह, जिसमें 07 महिला कैडर भी शामिल हैं, हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शांतिपूर्ण जीवन अपनाने की इच्छा व्यक्त करते हुए सरकार के समक्ष आगे आया है। पुनर्वास की प्रक्रिया के अंतर्गत वे एके- 47 राइफलें तथा अन्य श्रेणीबद्ध हथियार भी सौंपेंगे। 24 मार्च को हुआ यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस बात का सशक्त प्रमाण है कि नक्सल मुक्त बस्तर का संकल्प अब वास्तविकता का रूप ले चुका है।

बीजापुर पुलिस का दावा है कि बस्तर के दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार नक्सल संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है। सरकार की परिकल्पना और क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप बस्तर अब एक नई ऊर्जा, नए उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरने की दिशा में अग्रसर है। बीजापुर पुलिस ने आशा जताई है कि शेष बचे कुछ कैडर, जो वर्तमान में छोटे-छोटे समूहों में भटक रहे हैं, वे भी आने वाले दिनों में शांति का मार्ग चुनते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगे। साउथ सब जोनल ब्यूरो क्षेत्र से आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी 18 कैडरों, जिनमें डीकेएसजेडसी सदस्य पापा राव भी शामिल हैं और इनके औपचारिक पुनर्वास की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

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आदिवासियों की संस्कृति में बसती है छत्तीसगढ़ की आत्मा – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु https://statemediaservice.com/2026/02/07/84439/ https://statemediaservice.com/2026/02/07/84439/#respond Sat, 07 Feb 2026 11:17:39 +0000 https://statemediaservice.com/?p=84439 ० राष्ट्रपति ने आदिवासी बालिका को पढ़ाने का किया आह्वान ० बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग…

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० राष्ट्रपति ने आदिवासी बालिका को पढ़ाने का किया आह्वान

० बस्तर पंडुम के संभाग स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में बस्तर पहुंची राष्ट्रपति

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा । सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बस्तर पंडुम जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव – राज्यपाल रमेन डेका

राज्यपाल रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे।

राज्यपाल डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है।

बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।

अब नया बस्तर – डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक समय था जब बस्तर को नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाना जाता था, लेकिन आज डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटी बजती है। जहाँ कभी तिरंगा नहीं लहरा पाता था, आज वहाँ राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। गणतंत्र दिवस पर बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो लोकतंत्र और संविधान की जीत है।

नियद नेल्ला नार, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान विकास के मील के पत्थर

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आदिवासी क्षेत्रों में विकास के मील के पत्थर हैं। इन योजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ पहुँची हैं। नई पुनर्वास नीति के से जो लोग कभी बंदूक के रास्ते पर थे, वे अब सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। चिल्कापल्ली, तेमेनार और हांदावाड़ा जैसे गाँवों में वर्षों बाद बिजली पहुँची है, यह केवल रोशनी नहीं, बल्कि आशा और भविष्य का उजाला है।

जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर और वैश्विक पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की पहचान वनोपज से भी है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाई गई है, चरण-पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज को उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गाँव को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में शामिल किया गया है। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और कोटमसर गुफाएँ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान हैं।

युवा अब हथियार नहीं, खेल और कला से बना रहे पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। लाखों युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बदलाव का सबसे सशक्त प्रमाण है।

बस्तर की नई पहचान को मजबूत करने का आह्वान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बस्तर आगमन ऐतिहासिक है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बेटियों के सपनों को उड़ान मिलेगी और बस्तर को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बस्तर को शांति, समृद्धि और संस्कृति का केंद्र बनाएँगे, जिस पर पूरे देश को गर्व हो। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।

कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया तथा कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह, सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक  सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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नक्सलियों की राजधानी में घुसी फोर्स, ढहा दिया नक्सल स्मारक https://statemediaservice.com/2026/02/07/84418/ https://statemediaservice.com/2026/02/07/84418/#respond Sat, 07 Feb 2026 08:10:32 +0000 https://statemediaservice.com/?p=84418 ० कुतुल को नक्सलियों ने बना रखा था राजधानी  (अर्जुन झा)जगदलपुर। 31 मार्च 2026 यानि नक्सलवाद के खात्मे की मुकर्रर तारीख। यह डेड लाइन केंद्र सरकार ने दे रखी है।…

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० कुतुल को नक्सलियों ने बना रखा था राजधानी 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। 31 मार्च 2026 यानि नक्सलवाद के खात्मे की मुकर्रर तारीख। यह डेड लाइन केंद्र सरकार ने दे रखी है। इस संकल्प को पूरा करने छत्तीसगढ़ सरकार, पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। इसी का नतीजा है कि अब सुरक्षा बल नक्सालियों की अघोषित राजधानी में भी घुसने में कामयाब हो गए हैं। यह एक बड़ी उपलब्धि है। इस नक्सल राजधानी में फोर्स ने नक्सल स्मारक को जमींदोज कर दिया।
बस्तर संभाग का नारायणपुर जिला नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित रहा है। इस जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है, मगर अब सुरक्षा बलों ने यहां भी अपनी पैठ जमा ली है। इसी क्रम में पुलिस एवं 41वीं वाहिनी इंडो तिब्बत बार्डर पुलिस आईटीबीपी की संयुक्त टीम ने नक्सलियों की अघोषित राजधानी माने जाने वाले कुतुल क्षेत्र के फरसगांव में निर्मित विशालकाय माओवादी स्मारक को बैक हो लोडर की मदद से ध्वस्त कर दिया। थाना कोहकामेटा क्षेत्रान्तर्गत आने वाले ग्राम फरसगांव (कुतुल) में नक्सलियों ने यह स्मारक बना रखा था, जिसे क्षेत्र में नक्सल प्रभाव और प्रतीक के रूप में देखा जा रहा था। सुरक्षा बलों ने इसे चिन्हित करते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की मंशानुरूप नारायणपुर पुलिस की ओर से माओवाद मुक्त और सशक्त बस्तर की परिकल्पना को साकार करने के लिए लगातार माओवादी विरोधी “माड़ बचाओ” अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके तहत अबूझमाड़ क्षेत्र में नए सुरक्षा कैम्प स्थापित किए जा रहे हैं, साथ ही सड़क, पुल-पुलिया निर्माण और जनकल्याणकारी योजनाओं को अंदरूनी गांवों तक पहुंचाने में सहयोग किया जा रहा है।
इसी क्रम में शुक्रवार को जिला पुलिस बल एवं 41वीं वाहिनी आईटीबीपी की संयुक्त टीम माओवादी विरोधी अभियान एवं एरिया डॉमिनेशन के उद्देश्य से कुतुल, फरसगांव एवं आसपास के क्षेत्रों में रवाना हुई थी। इस दौरान ग्राम फरसगांव में मौजूद माओवादी स्मारक को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण तथा विकास कार्यों को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

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