#ForestDepartment Archives - statemediaservice.com https://statemediaservice.com/tag/forestdepartment/ सत्य पर प्रकाश Wed, 18 Mar 2026 07:03:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://statemediaservice.com/wp-content/uploads/2024/08/cropped-new-logo-2021-32x32.jpg #ForestDepartment Archives - statemediaservice.com https://statemediaservice.com/tag/forestdepartment/ 32 32 214855051 बस्तर में ‘खामोश कत्ल’: फंदों में तड़पकर मरे बाघ-तेंदुए, वन विभाग का अफसर ही निकला शिकारी गिरोह का मास्टरमाइंड https://statemediaservice.com/2026/03/18/86953/ https://statemediaservice.com/2026/03/18/86953/#respond Wed, 18 Mar 2026 07:03:53 +0000 https://statemediaservice.com/?p=86953 जगदलपुर। बस्तर के घने जंगलों से सामने आई यह घटना सिर्फ वन्यजीव शिकार नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी सड़ांध को उजागर करती है। इंद्रावती और बीजापुर के जंगलों में एक…

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जगदलपुर। बस्तर के घने जंगलों से सामने आई यह घटना सिर्फ वन्यजीव शिकार नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी सड़ांध को उजागर करती है। इंद्रावती और बीजापुर के जंगलों में एक बाघ और एक तेंदुए की दर्दनाक मौत ने वन सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत खोलकर रख दी है।
जानकारी के मुताबिक, दोनों वन्यजीवों को गोली से नहीं, बल्कि बेहद क्रूर तरीके से मारा गया। शिकारियों ने जंगल में जगह-जगह तार के फंदे बिछाए, जिनमें फंसकर बाघ और तेंदुआ 2-3 दिनों तक तड़पते रहे और आखिरकार दम तोड़ दिया। यह कोई आम शिकार नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित गिरोह की करतूत है।
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा दंतेवाड़ा वन विभाग के डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद कोयाम का नाम सामने आना है। जिस पर जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा बन गया। यह खुलासा वन विभाग की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से बाघ और तेंदुए की खाल बरामद की गई है, जिन्हें बाइक के जरिए रायपुर ले जाकर बेचने की योजना थी। शुरुआती जांच में साफ हुआ है कि शिकार हाल ही में किया गया था।
मारा गया बाघ करीब 3 साल का युवा था—एक ऐसी दहाड़, जो अब हमेशा के लिए खामोश हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार, शिकारियों ने पुराना लेकिन बेहद खतरनाक तरीका अपनाया—मांस का लालच देकर फंदे में फंसाना और फिर गले में तार कसकर उन्हें तड़पने के लिए छोड़ देना।
यह घटना सिर्फ दो वन्यजीवों की मौत नहीं, बल्कि उस भरोसे की हत्या है जिस पर जंगलों की सुरक्षा टिकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आखिर इन जंगलों में सुरक्षित कौन है?

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वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप हो सभी गतिविधियों का संचालन : मुख्यमंत्री साय https://statemediaservice.com/2026/02/13/84883/ https://statemediaservice.com/2026/02/13/84883/#respond Fri, 13 Feb 2026 12:46:27 +0000 https://statemediaservice.com/?p=84883 ० मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक संपन्न रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़…

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० मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक संपन्न

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की 16वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में बोर्ड की 15वीं बैठक के पालन प्रतिवेदन तथा नवीन एजेंडों पर चर्चा उपरांत प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के निर्णय हेतु प्रेषित करने पर सहमति बनी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वन्यजीव हमारी प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण–संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सतत निगरानी, अवैध गतिविधियों पर रोक तथा उनकी सुरक्षा के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही, वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने और युवाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने न्यूनतम हस्तक्षेप के सिद्धांत को अपनाते हुए अत्यावश्यक कार्यों को ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बिना किसी छेड़छाड़ के पूर्ण करने पर बल दिया। उन्होंने सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप सभी गतिविधियों के संचालन की बात कही।

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (Standing Committee of State Board for Wildlife) के गठन को मंजूरी दी गई। स्थायी समिति का गठन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में किया जाएगा, जिसमें 11 अन्य सदस्य शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि वन्य प्राणियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होने वाले कार्यों के प्रस्तावों पर राज्य वन्यजीव बोर्ड का अभिमत अनिवार्य होता है। बोर्ड की बैठकों के बीच अधिक अंतराल के कारण प्रस्तावों की स्वीकृति में विलंब की स्थिति बनती है। स्थायी समिति के गठन से वैधानिक मंजूरियों के त्वरित निपटान तथा वन्यजीव प्रबंधन से संबंधित मुद्दों के शीघ्र निराकरण में सहायता मिलेगी। बैठक में उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व अंतर्गत बरबांधा जलाशय में बांध एवं नहरों के जीर्णोद्धार एवं नवीन कार्य, पीएम जनमन योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले के कवर्धा वनमंडल में पंडरीपानी मेन रोड से सौरु तक मार्ग मजबूतीकरण, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने से संबंधित 6 प्रस्ताव, सेमरसोत अभ्यारण्य में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में सीआरपीएफ कैंप की स्थापना तथा उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के प्रस्तावों का अनुमोदन कर उन्हें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति हेतु प्रेषित करने पर सहमति दी गई। कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक  धर्मजीत सिंह, मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अरुण कुमार पाण्डेय सहित बोर्ड के अन्य सदस्य एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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वन मंत्री केदार कश्यप बताये क्या प्रदेश में जंगलराज है जो वन विभाग शिकारियों का सामाजिक बहिष्कार, सामाजिक दण्ड, हुक्का पानी बंद कर सजा देगी – धनंजय सिंह https://statemediaservice.com/2026/02/05/84306/ https://statemediaservice.com/2026/02/05/84306/#respond Thu, 05 Feb 2026 10:04:59 +0000 https://statemediaservice.com/?p=84306 रायपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव विभाग द्वारा शिकारियों को सामाजिक बहिष्कार की सजा के फैसले पर सवाल खड़ा करते हुये प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय…

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रायपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव विभाग द्वारा शिकारियों को सामाजिक बहिष्कार की सजा के फैसले पर सवाल खड़ा करते हुये प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने वन मंत्री केदार कश्यप से पूछा, क्या प्रदेश में जंगलराज है जो शिकारियों को अब कानून नहीं बल्कि भीड़तंत्र सजा देगी? जो वन्य जीव जंतुओं के शिकार करने वाले शिकारियों का सामाजिक बहिष्कार कर, सामाजिक दंडित कर, हुक्का पानी बंद करने की सजा दी जायेगी। संविधान का शपथ लेने वाले मंत्री एवं संविधान के अधिकारों के तहत जिम्मेदारी निभाने की शपथ लेने वाले अधिकारी अब संविधान का पालन नहीं करेंगे। सामाजिक बहिष्कार को समाज हित में नहीं माना जाता। इससे घृणा, नफरत, जातिगत भेदभाव, तिरस्कार होता है, कई बार ये हिंसा का रूप ले लेता है। सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ता है। फिर ये कैसा सामाजिक बहिष्कार करने फैसला लिया गया। ये तो बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर जी के लिखे संविधान का अपमान है। सामाजिक बहिष्कार जैसे कुरीतियों पर कड़ाई से रोक फिर भाजपा सरकार सामाजिक बहिष्कार का सरकारी फ़ैसला तो तानाशाही फरमान है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि वन विभाग वन्य जीव जंतुओं की रक्षा नहीं कर पा रही है। लगातार शिकार की घटनाएं हो रही है। अपनी नाकामी छुपाने अब सामाजिक बहिष्कार कराने जैसे सरकारी फैसला ले रही है। दिसम्बर 2025 में वन विभाग विभागीय बैठक में जो शिकारियों को पकड़ कर धर्म गुरु, गांव के मुखिया, प्रतिष्ठित व्यक्ति समाज सेवी संगठन के साथ बैठक कर समाजिक बहिष्कार कराने का फैसला लिया गया है ये तो वैमनस्यता फैलाने वाला है, संविधान के खिलाफ है। कांग्रेस मांग करती है इस फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाये। शिकारियों को कानूनी तौर पर कड़ी से कड़ी सजा मिले। वन्य जीव जंतुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो एवं सामाजिक बहिष्कार कराने जैसे फैसला लेने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही हो।

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