0 टेट की अनिवार्यता में शिथिलता, विभागीय परीक्षा, वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति और वेतन विसंगति दूर करने की मांग
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन द्वारा शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, न्याय और सम्मान की मांग को लेकर चरणबद्ध “सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा” का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में बस्तर जिले के सभी ब्लॉक मुख्यालयों में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की गई।

फेडरेशन के बस्तर जिला अध्यक्ष देवराज खुंटे ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। टेट की अनिवार्यता को शिथिल करते हुए विभागीय परीक्षा के लिए पर्याप्त अवसर दिया जाए तथा वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए। साथ ही सरकार द्वारा “मोदी की गारंटी” के तहत किए गए वादे के अनुरूप सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर क्रमोन्नत वेतनमान प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।जिला सचिव गणेश्वर नायक ने मांग रखी कि शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना करते हुए उन्हें सभी संबंधित सेवा लाभ प्रदान किए जाएं, ताकि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ न्याय हो सके। फेडरेशन ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की घोषणा की है। इसके तहत अब 29 अगस्त को जिला स्तरीय धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन तथा इसके बाद 9 सितंबर को मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव किया जाएगा। इसके पश्चात मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन आंदोलन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई है।फेडरेशन के ब्लाक अध्यक्ष काशीनाथ बघेल, कमलसाय कश्यप, अधीन सोरी, कौशिल्या सोरी, मेहताब बघेल, कृष्णा लाल गंधर्ला, ईश्वर बंधाइया ने कहा कि शिक्षक सरकार के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे अपने संवैधानिक एवं सेवा संबंधी अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षकों को सेवा सुरक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। वर्षों तक ईमानदारी से शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले शिक्षकों को भविष्य की अनिश्चितता में नहीं छोड़ा जा सकता। फेडरेशन ने सरकार को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। शिक्षकों की मांगों पर समयबद्ध और ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि सरकार जल्द ही सेवा सुरक्षा सहित सभी मांगों का समाधान नहीं करती और शिक्षकों के हित में रास्ता नहीं निकालती है, तो फेडरेशन निर्णायक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। फेडरेशन ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षकों के भविष्य, सेवा सुरक्षा, सम्मान और न्याय की लड़ाई है। मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।