रूमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित महिला का सफल जगदलपुर में टोटल नी रिप्लेसमेंट

0 बस्तर के डॉक्टरों ने कर दिखाया बड़ा कमाल 
जगदलपुर। बस्तर के डॉक्टरों ने वह कमाल कर दिखाया है, जो महानगरों के बड़े अस्पतालों में ही संभव है। स्व. बलिराम कश्यप स्मृति मेडिकल कॉलेज डिमरापाल जगदलपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में रूमेटॉइड आर्थराइटिस से लंबे समय से पीड़ित 44 वर्षीय महिला मरीज का सफल लेफ्ट टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया।
मरीज लंबे समय से रूमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित थी, जिसके कारण उसके बाएं घुटने के जोड़ में गंभीर क्षति हो गई थी। उन्हें घुटने में लगातार दर्द, अकड़न तथा चलने-फिरने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। चिकित्सकीय परीक्षण एवं आवश्यक जांचों तथा एक्स-रे के बाद घुटने के जोड़ में गंभीर क्षति पाए जाने पर विशेषज्ञों द्वारा लेफ्ट टोटल नी रिप्लेसमेंट करने का निर्णय लिया गया।रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक दीर्घकालिक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों को प्रभावित करती है। लंबे समय तक बीमारी रहने पर घुटने के जोड़ में सूजन, दर्द, अकड़न, विकृति तथा जोड़ की संरचना को गंभीर नुकसान हो सकता है। जब दवाइयों एवं अन्य गैर-सर्जिकल उपचारों से पर्याप्त राहत नहीं मिलती और जोड़ को गंभीर क्षति हो जाती है, तब चयनित मरीजों में टोटल नी रिप्लेसमेंट प्रभावी उपचार विकल्प हो सकता है।ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम द्वारा मरीज की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण एवं सावधानी पूर्वक सर्जिकल प्लानिंग करने के बाद आधुनिक तकनीक के साथ सफलता पूर्वक बाएं घुटने का टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया। रूमेटॉइड आर्थराइटिस के मरीजों में हड्डियों की गुणवत्ता में कमी, जोड़ की विकृति तथा अन्य चिकित्सकीय चुनौतियां हो सकती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सर्जरी के दौरान विशेष सावधानी एवं बेहतर सर्जिकल प्लानिंग आवश्यक होती है। सर्जरी के पश्चात मरीज को विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया तथा फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास प्रारंभ कराया गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में संतोषजनक सुधार देखा गया तथा घुटने के दर्द में उल्लेखनीय राहत के साथ चलने-फिरने की क्षमता में भी सुधार हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार गंभीर रूमेटॉइड आर्थराइटिस के कारण घुटने के जोड़ को होने वाली क्षति से मरीज की दैनिक गतिविधियां काफी प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे उचित मरीजों में समय पर किया गया टोटल नी रिप्लेसमेंट दर्द कम करने और घुटने की कार्यक्षमता एवं गतिशीलता में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सफल परिणाम के लिए उचित मरीज का चयन, सटीक सर्जिकल प्लानिंग, विशेषज्ञ टीम की देखरेख तथा ऑपरेशन के बाद नियमित फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण है।

यह सफल लेफ्ट टोटल नी रिप्लेसमेंट गंभीर रूमेटॉइड आर्थराइटिस से पीड़ित मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस प्रकार की जटिल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होने से बस्तर संभाग एवं आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उन्नत ऑर्थोपेडिक उपचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त हो रहा है। यह बड़ी कामयाबी मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. सुनीत पॉल, डॉ. मुकेश ध्रुव, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. प्रवेश मिश्रा, डॉ. आदित्य कौशिक, फिजियोथेरेपी विभाग के डॉ. भारतेंदु कमल, डॉ. जन्मेजय, डॉ. मुकेश साहू, डॉ. कुलदीप भारद्वाज और एनेस्थीसिया विभाग
से डॉ. सुष्मिता नायक, डॉ. रविशंकर, डॉ. गुलाब काशी, डॉ. चित्रकांत काशी की टीम ने हासिल की है।

“आयुष्मान” बनी वरदान
मरीज़ का इलाज आयुष्मान योजना के तहत पूर्णतः निशुल्क किया गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत ही लगभग 65 हजार रुपए का जॉइंट रिप्लेसमेंट इम्प्लांट निशुल्क किया गया। मरीज़ के भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक पूरी जांच, इलाज, दवाइयां आदि पूर्णतः निशुल्क रही। इस तरह आयुष्मान भारत योजना इस महिला के लिए वरदान साबित हुई है।