भिरलिंगा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क कीचड़ से सराबोर…

० मुसीबत, खेत में तब्दील सड़क से ग्रामीण बेहाल 
बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भिरलिंगा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क बारिश के मौसम में बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है कि कई स्थानों पर सड़क खेत और दलदल में तब्दील नजर आ रही है। कीचड़ के कारण ग्रामीणों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है, वहीं दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण और रखरखाव में ठेकेदार की गंभीर लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की खराब स्थिति की जानकारी कई बार विभागीय अधिकारियों को दी गई है। ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी अधिकारियों को फोन के माध्यम से कई बार सूचना दी। करीब एक सप्ताह पहले भी सड़क की स्थिति से विभाग को अवगत कराया गया था। तब ग्रामीणों को बताया गया था कि जल्द वाहन भेजकर सड़क को दुरुस्त कराया जाएगा, लेकिन सप्ताहभर से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो कोई विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही ठेकेदार द्वारा सड़क की स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस पहल की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के कुछ हिस्सों में मिट्टी डालकर सुधार करने का प्रयास किया गया, लेकिन उचित तकनीकी व्यवस्था और जल निकासी के अभाव में बारिश के बाद वही मिट्टी कीचड़ और दलदल में बदल गई। इससे सड़क पर वाहन फंसने और दुर्घटना होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि बारिश के मौसम में सड़क सुधार के नाम पर केवल मिट्टी डालकर छोड़ दिया जाएगा तो ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा कैसे मिलेगी? ग्रामीणों ने सड़क की तकनीकी जांच कराने तथा गुणवत्तापूर्ण तरीके से मरम्मत कराने की मांग की है।

नदारद है साइन बोर्ड
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कार्य को लेकर एक और गंभीर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण स्थल पर आज तक आवश्यक साइन बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। निर्माण कार्य की जानकारी, योजना का नाम, लागत, ठेकेदार और संबंधित विभाग से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में शुरू से ही लापरवाही बरती गई और निर्माण कार्य की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी तथा ठेकेदार मौके पर नियमित रूप से नजर नहीं आए। ग्रामीणों ने मांग की है कि विभाग सड़क की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और रखरखाव की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।

सरपंच की सूचना नजरअंदाज
ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कई बार फोन कर सड़क की स्थिति की जानकारी दी। इसके बावजूद अब तक कोई विभागीय अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बाद यदि विभागीय अधिकारी और ठेकेदार एक बार मौके पर आकर स्थिति देख लेते तो समस्या का समाधान काफी हद तक हो सकता था। मामले में एक व्यक्ति द्वारा विभागीय इंजीनियर से फोन पर सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि बातचीत के दौरान इंजीनियर ने सड़क की स्थिति के लिए सरपंच द्वारा ही रास्ता खुदवाए जाने की बात कही।ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा बयान बिना मौके का निरीक्षण किए दिया गया है तो यह गंभीर विषय है। ग्रामीणों ने विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है।

एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल
सड़क की बदहाली के कारण सबसे बड़ी चिंता आपातकालीन स्थिति को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना पड़े तो खराब और दलदली सड़क के कारण एंबुलेंस तथा अन्य आपातकालीन वाहन के गांव तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पीएमजीएसवाई विभाग के उच्च अधिकारियों से तत्काल मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण कराने, जल निकासी की व्यवस्था करने, कीचड़ हटाने और सड़क को आवागमन योग्य बनाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की जिम्मेदारी ठेकेदार और निगरानी की जिम्मेदारी विभाग की है, लेकिन लापरवाही का पूरा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने को मजबूर होंगे। अब देखना होगा कि ग्रामीणों की बार-बार शिकायत के बाद विभाग कब मौके पर पहुंचता है और भिरलिंगा की बदहाल प्रधानमंत्री सड़क को कब तक स्थायी रूप से आवागमन योग्य बनाया जाता है।

सरपंच ने डलवाई है मिट्टी
विभाग द्वारा सही तरीके से सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा था, किंतु सरपंच द्वारा मिट्टी डलवाने से बरसात में सड़क कीचड़ हो गया है, फिर भी हम सड़क की दशा सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।
-इंद्रदेव मिश्रा,
इंजीनियर, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना