
बीजापुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर युवा सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सीताशरण सोनी ने बीजापुर जिले के दुर्गम एवं लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर तिरंगा यात्रा’ निकाली। तिरंगा हाथ में लेकर वे बिना किसी सुरक्षा दल के इन दुर्गम गांवों तक पहुंचे और ग्रामीणों एवं बच्चों से सीधा संवाद किया।
आशीष सीताशरण सोनी ने दुगलमगुड़ा, दम्मूर, तोरेमपारा, रेड्डीपल्ली, वरदली, नल्लमपल्ली, लिंगापुर, शिवपुर दुबा, रायगुड़ा, गंगाराम, वारेगुड़ा, पेठाबुगड़ा, हाई स्कूल सकनापल्ली, गोखुर, वाडला, पोलेम, विराडगट्टू और मट्टीमरका सहित अनेक गांवों का दौरा किया।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, आजादी के बाद बीते 80 वर्षों में पहली बार इस दुर्गम क्षेत्र के इन गांवों तक कोई व्यक्ति तिरंगा लेकर ‘हर घर तिरंगा यात्रा’ के रूप में पहुंचा है। लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव और भय के वातावरण से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में तिरंगे के साथ पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए भावनात्मक और महत्वपूर्ण क्षण रहा।
यात्रा के दौरान आशीष सोनी ने घर-घर जाकर बच्चों से मुलाकात की तथा उन्हें तिरंगा झंडा और चॉकलेट वितरित की। तिरंगा हाथों में लेकर बच्चों ने उत्साह के साथ “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के उद्घोष किए।
यह क्षेत्र लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद की हिंसा से प्रभावित रहा है। इंद्रावती नदी के आसपास का यह दुर्गम इलाका पूर्व में छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के बीच उग्रवादी गतिविधियों के आवागमन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा है। ऐसे क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आवाजाही लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण रही है।
‘हर घर तिरंगा यात्रा’ के दौरान आशीष सोनी ने ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद किया और स्थानीय परंपराओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार तथा मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को जानने का प्रयास किया। उन्होंने ग्रामीणों के अनुभवों और स्थानीय आवश्यकताओं को समझते हुए क्षेत्र के विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा बस्तर संभाग में सुरक्षा, विकास, जनजातीय कल्याण और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई।
यात्रा के दौरान मां भारती के अमर सपूत एवं बस्तर के महान जननायक गुण्डाधुर का भी स्मरण किया गया। आशीष सीताशरण सोनी ने युवाओं से गुण्डाधुर के अदम्य साहस, संघर्ष और राष्ट्रनिष्ठा की शौर्यगाथा से प्रेरणा लेने तथा अपने जीवन में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक दायित्व और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का आग्रह किया।
तिरंगा यात्रा में स्थानीय युवा गादे शैलेश ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। उन्होंने दुर्गम गांवों तक पहुंचने और स्थानीय ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
दिनभर की यात्रा और ग्रामीणों से संवाद के बाद आशीष सीताशरण सोनी ने दुगलमगुड़ा गांव में रात्रि विश्राम किया। ग्रामीणों के बीच रात्रि विश्राम कर उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ आत्मीय संवाद जारी रखा और क्षेत्र की परिस्थितियों, परंपराओं तथा जनसमस्याओं को और करीब से समझने का प्रयास किया।
दूरस्थ गांवों में बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और “भारत माता की जय” तथा “वंदे मातरम्” के नारों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। दुर्गम बस्तियों में तिरंगा पहुंचाने की यह पहल राष्ट्रीय एकता, संवाद और विकास के संदेश को उन क्षेत्रों तक ले जाने का प्रयास रही, जो लंबे समय तक हिंसा और अलगाव की परिस्थितियों से प्रभावित रहे हैं।