पाट जात्रा पूजा के साथ शुरू हुआ 75 दिवसीय बस्तर दशहरा, रथ निर्माण की परंपरा का हुआ शुभारंभ

जगदलपुर। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का बुधवार को हरेली अमावस्या के पावन अवसर पर विधिवत शुभारंभ हो गया। मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में पारंपरिक पाट जात्रा पूजा विधान संपन्न हुआ। इसी के साथ दशहरा पर्व के लिए रथ निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई।

पूजा विधान के दौरान रथ निर्माण के लिए आवश्यक ठुरलू खोटला की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। बस्तर दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति और आदिवासी परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।

बस्तर दशहरा के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 24 सितंबर को डेरी गड़ाई पूजा विधान होगा। इसके बाद 10 अक्टूबर को काछनगादी, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना और 12 अक्टूबर को जोगी बिठाई की रस्म होगी। 13 से 18 अक्टूबर तक नवरात्रि पूजा और रथ परिक्रमा के विभिन्न विधान संपन्न होंगे।

18 अक्टूबर को बेल पूजा और 19 अक्टूबर को महाअष्टमी तथा निशा जात्रा पूजा होगी। 20 अक्टूबर को कुंवारी पूजा, जोगी उठाई और मावली परघाव के आयोजन होंगे। इसके बाद 21 अक्टूबर को भीतर रैनी और 22 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान के साथ रथ परिक्रमा होगी।

23 अक्टूबर को सुबह काछन जात्रा पूजा के बाद दोपहर में मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। 24 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा के दौरान ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी। इसके बाद 27 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का समापन होगा।

पाट जात्रा पूजा के दौरान महापौर संजय पाण्डे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, कलेक्टर आकाश छिकारा, अपर कलेक्टर सीपी बघेल सहित बस्तर दशहरा समिति के सदस्य, पारंपरिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और बड़ी संख्या में सेवादार मौजूद रहे।