
0 राजपुर में दिया जा रहा है 4 किलो कम चावल
0 बोरियों में 35 की जगह निकल रहा महज 31 किलो ही चावल
(अर्जुन झा)जगदलपुर। बस्तर जिले में गरीबों के निवाले की खुलेआम चोरी की जा रही है। गरीबों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत शासन द्वारा दिए जा रहे चावल में खुलकर डंडीमारी की जा रही है। उन्हें निर्धारित 35 किलो चावल की जगह मात्र 31 किलो चावल दिया जा रहा है। बंद बोरियों में कम चावल आ रहा है। सरकारी राशन दुकानों के इलेक्ट्रॉनिक तराजू में चावल की बोरी का वजन पूरे 35 किलो नजर आता है, मगर उसकी कहीं और तौलाई करने पर वजन 31 किलो निकलता है। इसका साफ मतलब है कि शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के इलेक्ट्रॉनिक तराजू में छेड़छाड़ की गई है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला बस्तर ब्लॉक की ग्राम पंचायत राजपुर से सामने आया है।
राजपुर की उचित मूल्य दुकान में सरपंच पति रघुनाथ कश्यप, उप सरपंच सामनाथ कश्यप एवं राशन दुकान संचालक रुपेश बघेल, सुकमन मौर्य द्वारा राशन वितरण में खुलेआम धांधली की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां इलेक्ट्रॉनिक कांटे में छेड़छाड़ की गई है। राशन दुकान के कांटा में चावल का वजन 35 किलो बताता है, जबकि दूसरे इलेक्ट्रॉनिक तराजू में तौल करने पर चावल का वजन 31 किलो बताता है। इस गड़बड़ी को लेकर ग्रामीणों भारी आक्रोश है। राजपुर की राशन दुकान में प्रत्येक राशनकार्ड धारक को 35 किलो के स्थान पर 31 किलो चावल वितरण किया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा विरोध दर्ज कराने के बावजूद सरपंच पति मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। सरपंच पति दलील देते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन जिला मुख्यालय से आया है। साथ ही वे अगस्त माह के वितरण के दौरान हर राशन कार्ड धारक को 4 किलो अतिरिक्त चावल देने की बात कह रहे हैं।उल्लेखनीय है कि कोई भी गरीब परिवार भूखा न सोए इस उद्देश्य से शासन ने प्रत्येक परिवार को 35 किलो चांवल देने की योजना पारदर्शी और ईमानदारी से चलाने के निर्देश दिए हैं। शासन की योजना और निर्देश का यहां मजाक बना दिया गया है। इसका सबसे अधिक नुकसान उन गरीब परिवारों को उठाना पड़ रहा है जो अपनी आजीविका एवं रोजमर्रा के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर निर्भर हैं। राजपुर की उचित मूल्य दुकान में चावल वितरण के दौरान कम तौल, निर्धारित मात्रा से कम चावल देना, रिकॉर्ड में हेरफेर करना, लाभार्थियों से अनुचित व्यवहार करना, वितरण में पक्षपात करना या अन्य प्रकार की अनियमितता की जाती है। यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली की मूल भावना के विरुद्ध है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि प्रत्येक पात्र हितग्राही को उसका पूरा अधिकार मिल सके और जनता का विश्वास शासन-प्रशासन पर बना रहे।