स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य आदेश पूर्ववर्ती भूपेश सरकार ने दिया : भाजपा

० पिछली भूपेश बघेल सरकार ने ही प्रदेश पर स्मार्ट मीटर का बोझ थोपा था – देवलाल ठाकुर

​रायपुर। ​भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने स्मार्ट मीटर मुद्दे को लेकर कांग्रेस और उसके शीर्ष नेताओं पर जोरदार हमला बोला है। श्री ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस जनता के बीच लगातार भ्रम फैलाने का काम कर रही है और स्मार्ट मीटर के नाम पर जो आंदोलन की राह पकड़ रही है, वह पूरी तरह उसका ढोंग और घड़ियाली आँसू बहाना है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठाकुर ने शनिवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में प्रेस ब्रीफ में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पिछली भूपेश बघेल सरकार ने ही प्रदेश पर स्मार्ट मीटर का बोझ थोपा था। अब कांग्रेस नेताओं और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को वर्तमान सरकार से सवाल पूछने के बजाय अपनी पूर्ववर्ती भूपेश सरकार और उनकी कैबिनेट से सवाल करना चाहिए। श्री ठाकुर ने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया वर्ष 2021 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही शुरू हुई थी। शुरुआत में यह तय किया गया था कि स्मार्ट मीटर केवल अमृत सिटी, औद्योगिक, व्यावसायिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में ही लगाए जाएंगे, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नियमों को दरकिनार करते हुए प्रदेश के आम घरेलू उपभोक्ताओं पर भी इसे जबरन थोप दिया।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ​श्री ठाकुर ने दस्तावेजों के आधार पर पूर्व कांग्रेस सरकार की मंशा और आर्थिक हितों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि रायपुर शहर-ग्रामीण, दुर्ग-राजनांदगाँव-जगदलपुर, और बिलासपुर-रायगढ़-अम्बिकापुर जैसे क्षेत्रों को तीन चरणों में बाँटकर घरेलू उपभोक्ताओं को एक साथ क्लब किया गया और लगभग 7 हजार करोड़ रुपये की टेण्डर प्रक्रिया जारी की गई। 2023 के विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से ठीक पहले तत्कालीन प्रदेश सरकार की हड़बड़ी पर सवाल उठाते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव की आचार संहिता 9 अक्टूबर को लागू हुई थी। आचार संहिता से ठीक पहले 7 व 8 अक्टूबर को सप्ताहांत (क्रमशः शनिवार व रविवार) था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने 6 अक्टूबर (शुक्रवार) को आनन-फानन में कंपनियों को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठाकुर ने कांग्रेस पर ‘आर्थिक हित’ साधने और ‘भ्रष्टाचार’ का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि आचार संहिता लागू होने से महज दो-तीन दिन पहले ऐसी क्या हड़बड़ी थी कि कार्य आदेश जारी कर दिया गया? अगर तत्कालीन सरकार चाहती, तो घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को इससे बाहर रख सकती थी या टेंडर प्रक्रिया को रोक सकती थी। लेकिन अपने निजी और आर्थिक हितों को साधने के लिए तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने यह वर्क ऑर्डर आनन-फानन में जारी किया। श्री ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस आज मुख्यमंत्री निवास के घेराव का नाटक कर रही है, जबकि ​कांग्रेस नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास का घेराव करना चाहिए और ​कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को अपनी ही पार्टी के नेताओं से पूछना चाहिए कि आखिर किस भ्रष्टाचार या आर्थिक लाभ के लिए छत्तीसगढ़ के घरेलू उपभोक्ताओं पर यह बोझ डाला गया? ​श्री ठाकुर ने कहा कि आज प्रदेश के उपभोक्ताओं को जो परेशानी झेलनी पड़ रही है, उसकी पूरी जिम्मेदार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार है।

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