
जगदलपुर। बस्तर जिले के नगर पंचायत बस्तर में वर्ष 2022-23 में शुरू हुआ मां गंगादेई शासकीय महाविद्यालय स्थापना के तीन वर्ष बाद भी अपने स्थायी भवन का इंतजार कर रहा है। भवन निर्माण के लिए भूमि आवंटित होने और बजट स्वीकृत होने के बावजूद संरक्षित वन क्षेत्र (रिजर्व फॉरेस्ट) से जुड़ी तकनीकी अड़चनों के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। परिणामस्वरूप कॉलेज आज भी अस्थायी भवन में संचालित हो रहा है और छात्र-छात्राओं को सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है।
जानकारी के अनुसार, तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में बस्तर, बकावंड और तोकापाल में नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना की गई थी, ताकि ग्रामीण और आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़े। इसी योजना के तहत नगर पंचायत बस्तर में मां गंगादेई महाविद्यालय की शुरुआत हुई। हालांकि, तीन साल बीत जाने के बाद भी कॉलेज को अपना स्थायी परिसर नहीं मिल पाया है।
पुराने अस्पताल भवन में चल रही पढ़ाई
फिलहाल महाविद्यालय का संचालन नगर पंचायत क्षेत्र के पुराने अस्पताल भवन में किया जा रहा है। सीमित कमरों और आधारभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद यहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कॉलेज में वर्तमान में बीए, बीकॉम और बीएससी पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
महाविद्यालय प्रबंधन के अनुसार, पिछले शैक्षणिक सत्र में 163 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। इस वर्ष भी प्रवेश प्रक्रिया जारी है और 14 अगस्त तक आवेदन लिए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों का बीए पाठ्यक्रम की ओर अधिक रुझान रहता है, जबकि बीकॉम और गणित विषयों में अपेक्षाकृत कम प्रवेश हो रहे हैं।
भवन निर्माण के लिए भूमि मिली, लेकिन फंसा मामला
कॉलेज के लिए ग्राम पंचायत भोंड में लगभग 7.9 एकड़ भूमि चिन्हित कर प्रशासन द्वारा आवंटित की गई थी। वर्ष 2024 में भवन निर्माण के लिए राशि भी स्वीकृत कर दी गई और प्रारंभिक तैयारियों के तहत स्थल पर बोर खनन का कार्य भी कराया गया।
लेकिन निर्माण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि चयनित भूमि का एक हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र में आता है। वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिलने के कारण भवन निर्माण का प्रस्ताव लंबित पड़ा हुआ है। जब तक वन संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं होतीं, तब तक निर्माण कार्य शुरू होना संभव नहीं है।
वैकल्पिक भूमि की तलाश भी नहीं हुई पूरी
सूत्रों के अनुसार, भवन निर्माण के लिए दूसरे स्थान पर पर्याप्त और उपयुक्त भूमि अब तक तय नहीं हो सकी है। यही कारण है कि महाविद्यालय का स्थायी परिसर बनने की दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराना या फिर वन विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त करना है।
छात्रों को हो रही परेशानी
अस्थायी भवन में संचालित होने के कारण विद्यार्थियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सीमित कक्षाएं, प्रयोगशालाओं और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं की कमी से पढ़ाई प्रभावित होती है। यदि कॉलेज का अपना आधुनिक भवन बन जाता है तो विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
समाधान की उम्मीद
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि कॉलेज भवन का निर्माण जल्द शुरू होना चाहिए, क्योंकि इससे क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का लाभ मिलेगा। शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशासन को वन विभाग के साथ समन्वय बनाकर लंबित अनुमति प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए या फिर शीघ्र वैकल्पिक भूमि उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि तीन वर्षों से इंतजार कर रहे इस महाविद्यालय को जल्द अपना स्थायी भवन मिल सके।