इस जिले में भाजपा नेताओं की कोई औकात नहीं!

0 सूचना के अधिकार के तहत जवाब देने से भी बच रहे हैं बड़े अफसर 
0 पूर्व कांग्रेसी मंत्री का रुतबा अब भी कायम 
(अर्जुन झा)जगदलपुर। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकमा के मूल निवासी और राज्य में भाजपा की सरकार भी है, लेकिन आज भी बस्तर संभाग के सुकमा जिले में पूर्व कांग्रेसी मंत्री की हुकूमत चलती है। इस जिले के अफसर और कर्मचारी इस पूर्व मंत्री के इशारे पर नाचते हैं। यही वजह है कि साय के सुशासन में भी जिले के दागी अधिकारी- कर्मचारियों का बाल भी बांका नहीं हो पा रहा है, क्योंकि ये दागी अधिकारी और कर्मचारी पूर्व मंत्री के विशेष कृपा पात्र रहे हैं। पूर्व मंत्री का रुतबा या खौफ ऐसा कि यहां सूचना के अधिकार वाला कानून भी नहीं चलता।
छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हुए हजारों करोड़ के कथित शराब घोटाले के आरोपों से घिरे पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा भले ही आज जमानत पर हैं और अपने निर्वाचन क्षेत्र से निर्वासित कर दिए गए हैं, मगर कोंटा क्षेत्र और पूरे सुकमा जिले के अधिकारी सत्तारूढ़ दल भाजपा के नेताओं और मंत्रियों से ज्यादा तवज्जो कांग्रेस के इस पूर्व मंत्री को देते हैं। कोंटा विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों में पूर्व सरकार के मंत्री के करीबी और चहेते माने जाने वाले कोंटा के पूर्व जनपद सीईओ के संरक्षण में वर्ष 2021 से 2023 के मध्य कागजों पर विकास कार्यों को अंजाम देकर पंचायत सचिव करोड़ों रुपए डकार चुके हैं। इस राशि की ऊपर तक बंदरबांट हुई है। इन पंचायत सचिवों के खिलाफ सरपंच, पंच ग्रामीण एवं भाजपा नेताओं ने प्रशासनिक अफसरों के समक्ष शिकायत कर इन घोटालों निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की थी। सारी शिकायतें फाईलों में दफन हो गई हैं। ऐसे अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल करने में लगे हैं। मामले में कार्रवाई को लेकर जिला पंचायत सीईओ सुकमा से जानकारी मांगे जाने आवेदकों को यह जवाब दिया जाता है कि मामला प्रकियाधीन है, संतुष्ट नहीं होने पर कलेक्टर के पास अपील करेन का सुझाव देते हुए अफसर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के आवेदन प्रस्तुत करता है तो नियमों को हवाला देकर 30वें दिन आवेदन अस्वीकृत होने की जानकारी वाला का पत्र भेज दिया जाता है। एक सामान्य सी जानकारी के लिए बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष जिला पंचायत सीईओ एवं कलेक्टर के चक्कर लगाते फिर रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर परिसर के मुख्यद्वार पर धरना प्रदर्शन पर भी बैठ चुके हैं।फिर भी प्रशासन मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहा है। खबर है कि जानकारी पूर्व सीईओ कोंटा जनपद पंचायत के पूर्व सीईओ के कारनामे उजागर होने के डर से जिले के जिम्मेदार अफसर कांग्रेस कार्यकाल के काले कारनामों की उजागर करने से बच रहे हैं। सुकमा जिले में नियमों की अनदेखी कर अफसर अपना नियम कानून चलाते हैं। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कागजों में विकास कार्यों को अंजाम देने वाला जनपद का एक अधिकारी अफसरों को आवभगत कर खुश कर चुके हैं जिसके चलते उनके काले कारनामे फाईलों में बंद है।

इन सचिवों पर अफसर मेहरबान
जानकारी के अनुसार कोंटा विकासखंड की गुमोड़ी पंचायत के सचिव बारसे बुधराम पर कागजों में विकास कार्यों को अंजाम देकर एक करोड से अधिक की राशि गबन करने का आरोप है। इस अनियमितता मामले में लगभग दो वर्ष पूर्व उनके निलंबन की कार्रवाई हुई थी। एलमपल्ली सचिव गिरीश कश्यप मृत व्यक्तियों के नाम पर राशि आहरण अन्य कई गंभीर आरोपों से घिरे हुए हैं। उन्हें bhi लगभग ढाई वर्ष पूर्व निलंबित किया जा चुका है। मुकरम सचिव प्रभात शाह पर भी ऑडिट रिपोर्ट में 80 लाख की रिकवरी का खुलासे के बाद अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दुलेड़ के पूर्व सचिव कोमल बघेल के खिलाफल जांच चार वर्षों बाद भी नहीं हो सकी है। इन पंचायत सचिवों के खिलाफ शिकायत कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक की गई है लेकिन दो वर्षों बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

आरटीआई में मांगी जानकारी
बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष सोलेमन गांडा ने जिला पंचायत सीईओ सुकमा से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत निलंबित सचिव बारसे बुधराम, गिरीश कश्यप, प्रभात शाह पर अनुशासनात्मक कानूनी कार्रवाई, विभागीय जांच आदि संबंध में जानकारी चाही गई थी। इस पर जिला पंचायत से मिले पत्र क्रमांक 727, 728 एवं 729 को 5 जून को पत्र जारी कर यह अवगत कराया गया कि गिरीश कश्यप की फाईल कार्यालय में निरंक है तो वहीं दो अन्य सचिवों के मामले में हर बार की तरह यह जवाब दिया गया कि कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। ज्ञात हो कि ऐसा ही जवाब विगत दो वर्षों से दिया जा रहा है। जबकि नियमानुसार विभागीय जांच कर राशि रिकवरी का नोटिस जारी एवं कानूनी कार्रवाई की जानी थी, लेकिन कांग्रेसी नेता के दबाव में मामला फाईलों में बंद है।

एक न चली डिप्टी सीएम की
जानकारी के अनुसार भाजपा नेता की शिकायत पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 22 फरवरी 2024 को सुकमा कलेक्टर को पत्र जारी कर एलमपल्ली सचिव गिरीश कश्यप के मामले की बिंदुवार जांचकर सेवा समाप्ति एवं एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। पत्र को संज्ञान लेते हुए सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को जांच के आदेश दिए थे। मगर जिम्मेदार अधिकारी जानकारी कार्यालय में निरंक होने का हवाला देकर पूर्व सरकार के दागी कर्मचारी को बचाने में जुटे हैं। सूत्रों से मिली जनकारी अनुसार कोंटा के पूर्व जनपद सीईओ ने अपने कर्मचारियों से अक्सर यह कहते रहे हैं कि सरकार जिसकी भी रहे, हम उसका खास बन जाते हैं। मेरे रहते मेरे करीबी सचिवों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और न ही कोई मुझे सुकमा जिले से कोई हटा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष ने मुझे सुकमा से हटाने विभागीय मंत्री को पत्र लिखा था, लेकिन विभागीय मंत्री के समक्ष प्रदेश अध्यक्ष की एक नहीं चली और आज भी वे सुकमा में ही काबिज हैं।

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