डॉ. थॉमस ने लौटाई 20 हजार से भी ज्यादा आंखों की रौशनी

0  जिला अस्पताल की डॉ. सारिता थॉमस ने रचा नेत्र ऑपरेशन का कीर्तिमान 
जगदलपुर। महारानी जिला चिकित्सालय जगदलपुर के नेत्र विभाग की प्रमुख डॉ. सरिता थॉमस की पहल पर हजारों नेत्रहीन ऑन को नई रोशनी मिली है। डॉ. सारिता थॉमस ने 20 हजार से भी ज्यादा आंखों का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान रच दिया है।
महारानी अस्पताल में नेत्र रोग विभाग की प्रमुख डॉ. सरिता थॉमस ने हजारों की संख्या में मरीजों के जीवन को नई रौशनी से भर दिया है। किसी अस्पताल की सफलता का मूल्यांकन केवल उसकी इमारत, उपकरणों या बजट से नहीं किया जा सकता। उसका वास्तविक मूल्यांकन उस भरोसे से होता है, जिस भरोसे के साथ मरीज अपने इलाज के लिए वहां पहुंचते हैं। यह भरोसा डॉक्टरों और स्टॉफ की मेहनत के दम पर वर्षों में बनता है। डॉ. श्रीमती थॉमस ने अपनी पद स्थापना से अब तक 20 हजार से अधिक नेत्र रोगियों की आंखों का सफल ऑपरेशन कर उनकी आंखों की रोशनी लौटाईं है। डॉ. सारिता थॉमस की इस अभूतपूर्व उपलब्धियों के लिए उन्हें राज्य सरकार से डॉक्टर सुभाष मिश्रा स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया गया है। देश ने कोविड-19 का सबसे कठिन और बुरा दौर देखा। अस्पतालों पर अभूतपूर्व दबाव था। अनेक स्थानों पर सामान्य चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही थीं, लेकिन बस्तर में स्वास्थ्य प्रशासन की ओर से नेत्र रोग विभाग समेत अन्य सभी विभागों में स्वास्थ्य सुविधाएं निरंतर जारी रखी गईं। कोरोना कल के उन चिकित्सकीय पेशे के योद्धाओं में डॉ. सारिता थॉमस की भूमिका भी काफी सराहनीयरही है। महारानी जिला अस्पताल में समय-समय पर लगने वाले नेत्र रोग शिविरों व नियमित उपचार के दौरान डॉक्टर सरिता ने वर्ष 2018 से आज तक सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए 20 हजार से अधिक नेत्र रोगियों का सफल सर्जरी कर उन्हें नई रोशनी प्रदान की, जिससे वह दोबारा दुनिया को अपनी आंखों से देख पा रहे हैं। लाभान्वित मरीजों में सफल सर्जरी के उपरांत किसी ने अपने बच्चों को तो किसी ने अपने माता-पिता का चेहरा अपनी आंखों से पहली बार देखा। डॉ. सरिता थॉमस की पहचान केवल उनके शल्य कौशल से नहीं है, उनके सहयोगी उन्हें अनुशासित प्रशासक, मरीज उन्हें संवेदनशील चिकित्सक और समाज उन्हें एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में देखता है जिसने सेवा को अपने पेशे का मूल आधार बनाया है। इसी योगदान के लिए उन्हें डॉ. सुभाष मिश्रा स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। यह एक मिथक है कि सरकारी अस्पतालों में उचित उपचार नहीं होता है लेकिन बस्तर के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों में इन उपलब्धियां के चलते निश्चित रूप से जिला महारानी अस्पताल के प्रति विश्विनीयता बढ़ी है।

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