० 17 हजार डॉक्टर पंजीकृत फिर मेडिकल कालेज अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित भर्ती क्यों नही हो रही है इलाज कैसे होगा?
रायपुर। सरकारी अस्पतलो में डॉक्टरों की रिक्त पदों पर भर्ती नही होने के लिए स्वास्थ्य मंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुये प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद खराब है मरीजो का ईलाज नही हो पा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर हुए स्वास्थ्य सर्वे में छत्तीसगढ़ की स्थित बेहद खराब है। सरकारी अस्पतालों में 60 प्रतिशत से अधिक मरीजो के मौत के लिए डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टॉफ की कमी को जिम्मेदार माना है।ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल को जनता को जवाब देना चाहिये कि प्रदेश में 17 हजार से अधिक डॉक्टर पंजीकृत है फिर सरकारी अस्पतालों मेडिकल कालेजों, स्वास्थ्य अधिकारी के पद रिक्त क्यों है? सरकार उनकी भर्ती क्यो नही कर रही है? मेडिकल कालेज अस्पताल में चिकित्सा विशेषज्ञ के 1773 पद स्वीकृत है लेकिन मात्र 355 डॉक्टर की सेवा दे रहे है? चिकित्सा अधिकारी के 2296 पद स्वीकृत है और मात्र 37 डॉक्टर नियमित है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 518 पद स्वीकृत है उसमें 375 पद खाली है ऐसे में मरीजों का उपचार कैसे होगा? सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कम संख्या से मरीजो के देखरेख ईलाज में दिक्कत है ही डॉक्टरों पर फिर दबाव ज्यादा है। अभी 5 नये मेडिकल कॉलेज की मान्यता भी इसलिए नही मिल पाई क्योंकि वहां डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ सहित संसाधन की व्यवस्था ये सरकार नही कर पायी?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा प्रदेश में डॉक्टरों की कमी का रोना रोने वाली भाजपा सरकार की नीयत में खोट है। जब प्रदेश में एमबीबीएस डॉक्टर 11132, एमडी विशेषज्ञ 2850, एमएस सर्जन 2740, डी एम 190, एमसीएच स्पेस्लिस्ट 230 की संख्या में पंजीकृत है तो भर्ती क्यो नही की जा रही है? सरकार निजी क्षेत्र बड़े मेडिकल संस्थाओं के दबाव में काम कर रही है इसलिए सरकारी असपतालो की जानबूझकर दुर्दशा की जा रही है ताकि मरीज के परिजन जान बचाने निजी अस्पतलो की ओर रुख करे और महंगे ईलाज के लिए अपने घर जमीन खेत जेवर बेचे मोटे ब्याज में साहूकारों से ईलाज के लिय कर्ज ले?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा स्वास्थ्य मंत्री तत्काल सरकारी अस्पताल मेडिकल कालेज में डॉक्टरों की नियमित भर्ती करें. ताकि गरीब मरीजों को निशुल्क बेहतर इलाज हो सके।