मनरेगा में 40 प्रतिशत राज्य पर भार प्रदेश की जनता पर अत्याचार – शुक्ला

० अंततः भूपेश सरकार की योजना रीपा का नाम बदल चालू करने बाध्य हुए

० मंत्रिमंडल के फैसले पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

रायपुर। मंत्रिमंडल के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मंत्रिमंडल के द्वारा मनरेगा के वित्तीय प्रावधान में 60-40 की मंजूरी दिये जाने का निर्णय राज्य के जनता पर अन्याय है। अभी तक मनरेगा केंद्र प्रवर्तित योजना थी, अब इसमें 40 प्रतिशत भाग राज्य को देना होगा। केंद्र सरकार की चाटुकारिता में साय सरकार ने राज्य के हितों का ख्याल नहीं रखा। राज्य के हिस्से को 40 प्रतिशत करने के केंद्र के फैसले का विरोध करने के बजाय इस राज्य मंत्रिमंडल के द्वारा अनुमोदित कर दिया गया। साथ ही इसके लिए 4000 करोड़ रू. का वित्तीय प्रावधान भी किया गया है, जबकि अभी तक राज्य के मनरेगा पर 6200 करोड़ रू. खर्च होते थे, इसका मतलब है भले घोषित तौर पर दिन बढ़ा दिया लेकिन सरकार की नीयत मनरेगा के काम में कटौती की है जब बजट कम है तो ज्यादा दिन कैसे काम देंगे? जीरामजी कानून पास हुए 8 महीने हो गये, अमूमन 15 जून के बाद मनरेगा के काम बंद हो जाते है। सरकार अब निर्णय ले रही मतलब इस फैसले से 4 माह तक काम नहीं होगा, उसके बाद काम शुरू होगा।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बड़ा प्रश्न यह है कि राज्य के वित्तीय संसाधन सीमित है। राज्य का सारा टैक्स तो जीएसटी के माध्यम से केंद्र लेता है फिर मनरेगा का बोझ राज्य पर डालने से राज्य के अन्य कार्य प्रभावित होंगे। भाजपा सरकार पिछले ढाई साल से वित्तीय रोना रोकर वैसे ही कोई नई योजना नहीं शुरू कर पाई है, अब मनरेगा का भार उठाने के बाद राज्य के और काम भी प्रभावित होंगे। यह फैसला राज्य की जनता के साथ धोखा है। राज्य को मनरेगा के मामले में केंद्र के सामने विरोध प्रकट करना था कि पूरा खर्च केंद्र उठाये या उसके लिए विशेष सहायता करे।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि साय मंत्रिमंडल ने अंततः भूपेश सरकार की एक और योजना को नाम बदलकर चलाने की मंजूरी दिया है। कांग्रेस सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रीपा (रूरल इंडस्ट्रियल पार्क) स्थापित किया था जो ग्रामीण उत्पादन और स्वजन तथा प्रसंस्करण इकाइयों का केंद्र थी तथा यहां से वस्तुओं को बेचने का बाजार भी बनाया गया था। सरकार में आने के बाद भाजपा ने उसे बंद कर दिया था लेकिन अब नाम बदलकर अटल आजीविका समृद्ध द्वार योजना के नाम से उसे फिर से शुरू करने जा रहे है। भाजपा सरकार के पास अपना मौलिक कुछ भी नहीं है। कांग्रेस सरकार की योजनाओं को पहले बंद किया अब उसी को फिर चलाने को बाध्य हो रहे है।

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