० कृषि विभाग ने सील किया था निजी गोदाम
० घटना से कृषि विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
(अर्जुन झा) जगदलपुर। कृषि विभाग ने अनियमितता के चलते नानगुर के जिस निजी खाद गोदाम को कुछ दिनों पहले सील कर दिया था, उस गोदाम से 1275 बोरी यूरिया खाद और 2 टन पोटाश के गायब हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम ने गोदाम मालिक और कृषि विभाग की भूमिका एवं कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐन खरीफ सीजन में हुई इस बड़ी धांधली ने विभाग की नाकामी की पोल खोल कर रख दी है।
बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित नानगुर में हुई इस बड़ी गड़बड़ी में कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की भी चर्चा जोरों पर है। कृषि विभाग द्वारा कुछ दिनों पहले ही नानगुर के अनन्या कृषि केंद्र और उसके गोदाम को सील किया था। सीलिंग कार्रवाई के दौरान गोदाम में 300 बोरी यूरिया खाद और 16 टन पोटाश भंडारित थी। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देश पर कृषि उप संचालक श्री श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई थी, मगर अनन्या कृषि केंद्र से खाद विक्रय पर रोक नहीं लगाई गई थी। इधर उर्वरक निरीक्षक और कृषि विभाग के अधिकारी उड़ीसा सीमा से लगे गांवों के कृषि केंद्रों की निगरानी में लगे रहे, उधर अनन्या कृषि केंद्र के सील्ड गोदाम से 1275 टन यूरिया खाद और 2 टन पोटाश रहस्यमय तरीके से गायब कर दी गई। इसकी भनक लगने के बाद जब जांच टीम पहुंची और गोदाम को खोला गया, तो वहां 1300 बोरी यूरिया की जगह महज 25 बोरी ही यूरिया और 14 टन पोटाश मिली। जांच टीम ने अनन्या कृषि केंद्र नानगुर के संचालक को नोटिस देकर 22 जून को कार्यालय में उपस्थित होने और जवाब प्रस्तुत करने कहा है। इस मामले में उर्वरक निरीक्षक सह सहायक संचालक कृषि की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल गोदाम को सील करने के बाद विभाग द्वारा 12 दिनों तक गोदाम की कोई खबर नहीं ली गई। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारीयों के संरक्षण में ही खाद की यह बड़ी हेराफेरी की गई है। सीलबंद गोदाम का ताला तोड़कर खाद की अफरा तफरी की गई है। उप संचालक श्री श्रीवास्त ने बताया कि सीलबंद गोदाम में यूरिया कम पाi गई है। इस मामले में संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।