चिखलाकसा में नेहा माथुर का नेह भरा समर कैंप, इतिहास रच गया यह शिविर

0 35 महिलाओं-बच्चियों को मुफ्त दी गई रेसिन और बॉटल आर्ट की ट्रेनिंग 
0  माथुर परिवार की मणिमाला में जुड़ गया एक और बेशकीमती नगीना 
(अर्जुन झा) दल्ली राजहरा। बिल्कुल पारिवारिक माहौल, भीषण गर्मी में शीतलता का अहसास, नेहा माथुर का नेह भरा मधुर व्यवहार, ममता की मूरत डॉ. शिरोमणि माथुर का वात्सल्य और माथुर परिवार के बच्चों का चुलबुलापन। इन सबके बीच पूरे छह दिनों तक हस्तकला की जादुई दुनिया में खोई रहीं करीब तीन दर्जन महिलाएं और बच्चियां। ये छह दिन कैसे गुजर गए, इसका जरा भी अहसास नहीं हुआ।
दल्ली राजहरा की पड़ोसी नगर पंचायत चिखलाकसा में प्रतिष्ठित माथुर परिवार की बहू नेहा माथुर द्वारा आयोजित छह दिवसीय निःशुल्क समर कैंप का रविवार को समापन हुआ। खास बात यह रही कि प्रशिक्षण के साथ-साथ रेसिन आर्ट, बॉटल आर्ट, क्ले आर्ट जैसी कलाओं की महंगी सामग्री भी माथुर परिवार ने खुद निःशुल्क उपलब्ध कराई थी। समापन समारोह में मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष कुंती देवांगन ने कहा-“दल्ली राजहरा में तो समर कैंप आयोजित होतेरहते हैं, लेकिन चिखलाकसा में जिस दरियादिली से माथुर परिवार ने आयोजन किया, वह एक मिसाल बन गया है। 35 महिलाओं-बच्चियों ने कला सीखी और उन्हें एक भी सामान लाने की जरूरत नहीं पड़ी। घर में जगह देना और महंगी किट फ्री देना, इससे बड़ी महानता नहीं हो सकती।” कुंती देवांगन ने बहुमुखी प्रतिभा की धनी माथुर परिवार की मुखिया डॉ. शिरोमणि माथुर सहित पूरे परिवार को धन्यवाद दिया और अगले साल भी कैंप लगाने का अनुरोध उन्होंने डॉ. शिरोमणि माथुर और श्रीमती नेहा माथुर से किया।

जुनून ऐसा कि बढ़ाना पड़ा कैंप
20 मई से 24 मई तक चले इस ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर में रेसिन आर्ट, बॉटल आर्ट, पेन होल्डर, क्ले आर्ट, कैंडल आर्ट, मिरर आर्ट सिखाई गई। प्रशिक्षार्थियों में जुनून ऐसा था कि वे शिविर की अवधि बढ़ाने की जिद करने लगे। उनकी मांग और डॉ. शिरोमणि माथुर के स्नेहिल निर्देश पर नेहा माथुर ने पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं के बावजूद शिविर को एक दिन और बढ़ा दिया।

खेलों में भी दिखाया दम
समर कैंप के दौरान माथुर परिवार के सदस्यों और प्रशिक्षण ले रही महिलाओं तथा बच्चियों के बीच ऐसा पारिवारिक एवं आत्मीय माहौल बन गया था कि परायेपन की सारी दूरियां मिट गईं। खेल खेल और मस्ती भरे माहौल में प्रशिक्षण का दौर चलता रहा। यही वजह रही कि इस दौरान खेल गतिविधियां भी आयोजित की गईं। कैंप में हुए खेलों में चंचल साहू प्रथम, दिशिका कुकरेजा एवं जपसीन भाटिया द्वितीय तथा योगिता, खुशी एवं पहल तृतीय रहीं। सभी को पुरस्कार दिए गए।

कला सब तक पहुंचे यही मकसद : नेहा
इस दौरान संस्कारी परिवार की बेटी और प्रतिभाओं के धनी माथुर परिवार की बहू नेहा माथुर ने कहा-“गर्मी की छुट्टियों में बच्चे समय बर्बाद कर देते हैं। महिलाएं भी रसोई के काम से निपटने के बाद अमूमन खाली ही रहती हैं। वहीं धन के अभाव में कई लोग कला सीख नहीं पाते। मेरा मकसद था कि जो मैंने सीखा है, उसे निःस्वार्थ बांटूं। हमने सभी को उनकी बनाई सामग्री घर ले जाने की छूट भी दी, ताकि वे और बेहतर कर सकें।” नेहा माथुर ने कहा कि कला और शिक्षा को अपने तक ही सीमित रखना कला और शिक्षा का अपमान है। मां सरस्वती ने हमें जो कुछ दिया है, उसे औरों से साझा करने के उद्देश्य से ही मैने यह शिविर आयोजित किया था। नगर पंचायत अध्यक्ष कुंती देवांगन दीदी का आग्रह मैं ठुकरा नहीं सकती और अगले साल मेरी कोशिश यही रहेगी कि ऐसा कैंप और ज्यादा दिनों तक आयोजित कर सकूं।

बहू ने परिवार का मान बढ़ाया : डॉ शिरोमणि माथुर
राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित लेखिका और माथुर परिवार की मुखिया डॉ. शिरोमणि माथुर ने कहा-“माथुर परिवार सामाजिक कार्य और साहित्य में नाम कमा चुका है। आज बहू नेहा ने कला का नाम भी जोड़ दिया। 6 दिन निःस्वार्थ प्रशिक्षण देकर उसने न सिर्फ माथुर परिवार की परंपरा आगे बढ़ाई है, बल्कि अपने परिवार का मान भी बढ़ा दिया है। मुझे बेटी की कमी कभी महसूस नहीं होने दी।इस शानदार और असरदार समर कैंप के समापन पर निरुपमा माथुर, अनिता जैन और विनीता बाफना विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *