रायपुर। किसानों को प्रति एकड़ दिये जाने वाले खाद की लिमिट में की गई कटौती को सरकार का किसान विरोधी निर्णय बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि इस बार किसानों को पिछले खरीफ सीजन में वितरित डीएपी का मात्र 60 प्रतिशत और यूरिया का 80 प्रतिशत देने का तुगलकी फरमान जारी किया गया है, केवल यही नहीं भाजपा सरकार ने सोसायटियों से नकदी और खाद के ऋण का रेसियो ही बदल कर खाद की लिमिट में 10 प्रतिशत की कटौती कर दिया है, नई व्यवस्था के अनुसार, कृषि ऋण में अब 70 प्रतिशत नकद राशि और केवल 30 प्रतिशत वस्तु (खाद-बीज) के रूप में दी जा रही है। पूर्व में, किसानों को ऋण का 60 प्रतिशत नगदी और 40 प्रतिशत खाद, बीज के रूप में मिलते थे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि खेती का समय निकल रहा है, किसान परेशान है, लेकिन सिस्टम और सरकार गलत बयानी कर रहे हैं। एक तरफ छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम दावा कर रहे कि प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक है, दूसरी ओर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह देश में 50 प्रतिशत उर्वरकों की कमी बता रहे। नियमों और प्रशासनिक अड़ंगों के नाम पर किसानों को खाद के लिए दर-दर भटकाया जा रहा है! वितरण व्यवस्था के नाम पर किसानों को सोसायटी के चक्कर काटने मजबूर किया जा रहा है, यह आदेश कि 2.50 एकड़ तक भूमि वाले सीमांत किसानों को निर्धारित यूरिया एकमुश्त दिया जाएगा। 2.50 से 5 एकड़ तक भूमि वाले लघु किसानों को दो किस्तों में और 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े किसानों को तीन किस्तों में खाद उपलब्ध कराया जाएगा?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि हाल ही में केंद्र की मोदी सरकार ने एनपीके की कीमत 180 रुपए प्रति बोरी और पोटास की कीमतों में 300 रुपए प्रति बोरी भारी भरकम वृद्धि की है अब खाद की लिमिट का कम होना किसानों के लिए एक गंभीर संकट है। सहकारी समितियों में खाद की कमी, मूल्य वृद्धि और वितरण के तरीके में बदलाव से किसान परेशान हैं। डबल इंजन की सरकार में किसान खाद की कमी से जूझ रहा है, 2 एकड़ में 50 किलो (1 बोरी) डीएपी, 5 एकड़ में 3 बोरी जबकि धान की खेती के लिए डीएपी की न्यूनतम आवश्यकता 50 किलो प्रति एकड़ है। एनपीके को डीएपी का विकल्प बताया जा रहा है, डीएपी की कीमत 1350 है जबकि एनपीके 1900 से 2400 रुपए प्रति बोरी है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार के खुद के दावों में विरोधाभास है, छत्तीसगढ़ को केन्द्र सरकार द्वारा 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की स्वीकृति मिली है, लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जो आवश्यकता का मात्र 48 प्रतिशत है अर्थात 52 प्रतिशत की कमी सरकारी दावे के अनुसार ही है। प्रदेश में सर्वाधिक संकट डीएपी का है जिसकी उपलब्धता मात्र 30 प्रतिशत है। यदि उपलब्धता पर्याप्त है तो लिमिट घटाने का क्या आधार है? एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन, किसान पहचान पत्र, उर्वरक टोकन की बाध्यता सर्वथा अनुचित है। किसान लगातार आंदोलित है, मंत्री विधायकों के कार्यालय का घेराव कर रहे हैं लेकिन यह सरकार समस्या को मानने को तैयार नहीं है, खाद संकट वैश्विक नहीं भाजपा निर्मित आपदा है, एलएनजी देने रूस और यूक्रेन तैयार है लेकिन ट्रंप के दबाव और खाद सब्सिडी में कटौती के लिए खाद का कृत्रिम संकट पैदा कर रही है सरकार।