
० समझाई बोली, भाषा, संस्कृति की अहमियत
जगदलपुर। अखिल भारतीय हल्बा हल्बी आदिवासी समाज ब्लॉक बस्तर एवं अखिल भारतीय हल्बा हल्बी प्रतिभा सम्मान सहभागिता समिति जगदलपुर के तत्वावधान में ब्लॉक बस्तर की ग्राम दुबेउमरगांव के सामाजिक भवन में जिला स्तरीय करियर मार्गदर्शन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि भानुप्रताप सिंह चुरेंद्र मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बस्तर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वसंत गांवरे अध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा हल्बी समाज ब्लॉक बस्तर ने की। सियाराम चनाप अध्यक्ष अखिल भारतीय हल्बा हल्बी समाज जिला बस्तर एवं जीआर ठाकुर विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ बस्तर की आराध्य मां दंतेश्वरी, वीर शिरोमणि शहीद गेंदसिंह नायक एवं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्रों पर दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद सामाजिक ध्वजारोहण कर अतिथियों का स्वागत पीला चावल, पगड़ी एवं बैच लगाकर किया गया। समारोह में कक्षा 10वीं के 12 बालक, 29 बालिकाओं समेत कुल 41 एवं 12वीं में 3 बालकों, 11 बालिकाओं समेत कुल 14 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।कक्षा 10वीं में 93.01 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले दिलशान मांझी एवं कक्षा 12वीं में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली हस्तिका धलनिया को समाज गौरव घोषित किया गया। स्नातक में वंदना बघेल, पीएम नवोदय में चयनित कुणाल शांडिल्य, प्रयास विद्यालय में चयनित हेमिका भोयर को सम्मानित किया गया। डॉ. किशन कुमार कस्तूरे एवं डॉ. पूजा पटेल के चिकित्सा अधिकारी नियुक्त होने पर तथा डॉ. पूजा पटेल को दुबे उमरगांव की प्रथम चिकित्सा अधिकारी नियुक्त होने पर सम्मानित किया गया। कुसुम शार्दुल को बस्तर मैराथन में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उत्कृष्टता पुरस्कार दिया गया।
वक्ताओं ने दिया मार्गदर्शन
नायब तहसीलदार फूलबत्ती भूआर्य ने छत्तीसगढ़ी बोली के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सीजी पीएससी में छत्तीसगढ़ी में प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए बोली लिखना, बोलना सीखें। कमल कोसमा ने कहा कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में बस्तर संभाग के स्वजातीय बच्चों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। मुख्य अतिथि भानुप्रतापसिंह चुरेंद्र ने कहा कि परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ-साथ मातृभाषा, संस्कृति, संस्कार में पारंगत होना जरूरी है। आईएएस, राज्य सेवा के साक्षात्कार में समाज, संस्कृति पर भी प्रश्न पूछे जाते हैं। डॉ. भागेश्वर पात्र ने कहा कि युवा अपने रीति-रिवाज परंपरा बनाए रखें और शिक्षा से समाज-देश के विकास में योगदान दें। गिरवर सिंह ठाकुर ने ग्रामीण स्तर पर नवोदय, पीएससी, आईएएस कोचिंग के लिए सहभागिता समिति बनाने का सुझाव दिया। कार्यक्रम संचालन विक्रमसिंह कुदराम एवं पुरुषोत्तम तारम ने किया। अंत में छेदीलाल बघेल ने आभार व्यक्त कर कार्यक्रम का समापन किया। इस दौरान प्रमुख रूप से गिरवर सिंह ठाकुर, शंभू ठाकुर, कमल कोसमा, धनसिंह रावटे, हरिश्चंद्र लेकाल, नंद कुमार प्रधान, गोदावरी रावटे, लेखाकुमारी उपाध्यक्ष, एम. ठाकुर, महेश मुरला, लालसिंह ठाकुर, तनूज भूआर्य, लक्ष्मी नाथ मांझी, कमलेश गोयल सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।