रेत के खेल में मालामाल हो रहे हैं अधिकारी और रेत माफिया

0 विभाग करता है दिखावे की कार्रवाई, टूटा ग्रामीणों का भरोसा 
0  2 टिप्पर और 2 ट्रैक्टर जप्त, अवैध भंडारण पर प्रकरण दर्ज 
(अर्जुन झा) जगदलपुर। बस्तर जिले की नदियों को छलनी कर रेत के खेल में खनिज विभाग के अधिकारी- कर्मचारी और रेत माफिया मालामाल हो हो रहे हैं।विभाग समय समय पर कार्रवाई जरूर करता है, मगर यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे की होती है। रेत के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के मामले पकड़े जाने पर लोग उसका मजाक बनाने लगते हैं।
दरअसल बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत बनियागांव व अन्य गांवों के आसपास भास्कली नदी व इंद्रावती नदी से तथा भानपुरी व बस्तर विकासखंडों के नदी नालों से बड़े पैमाने पर रेत का दोहन लंबे समय से होता आया है। बनियागांव में तो रेत के खनन व परिवहन में तो खनिज विभाग के ही अधिकारी की मशीनों और वाहनों के उपयोग के आरोप लगते रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से कलेक्टर व एसडीएम से शिकायत करते आए हैं। मगर कभी भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई।. इसलिए लोगों का भरोसा खनिज विभाग पर से उठ गया है। अब फिर कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार जिले में अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई खनिज विभाग द्वारा की गई है। 23 मई को खनिज अधिकारी शिखर चेरपा के मार्गदर्शन में खनिज विभाग की टीम ने बस्तर और बडांजी क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई की। जांच के दौरान 2 टिप्पर और 2 ट्रैक्टर को अवैध रूप से रेत परिवहन करते पकड़ा गया। खनिज अमले ने वाहनों सहित रेत को जप्त कर पुलिस थाना बस्तर की अभिरक्षा में रखा है। वहीं ग्राम पालाबहार और बड़े आमाबाल क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण का भी एक प्रकरण दर्ज किया गया है। कार्रवाई में जिला खनिज जांच दल के सदस्य सहायक खनिज अधिकारी जागृत गायकवाड़, खनिज निरीक्षक अंकित पुरी, खनिज सिपाही डिकेश्वर खरे और कृष्णा उपस्थित रहे। खनिज विभाग ने बताया कि संबंधित प्रकरणों में नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार जिले में खनिज रेत के अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार जांच और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मगर सवाल अब भी कायम है कि चंद रुपए जुर्माने के रूप में अदा करने के बाद रेत माफिया फिर से कमाल दिखाने लग जाते हैं। जाहिर सी बात है खनिज विभाग के संरक्षण में ही रेत माफिया ऐसा दुस्साहस करते हैं।

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