० गर्मी के बीच बच्चों और पर्यटकों की तफरीह पर लगा विराम
० सुरक्षा गार्ड न होने से प्रबंधन ने की तालाबंदी
दल्लीराजहरा। लौह अयस्क नगरी दल्लीराजहरा का एकमात्र प्रमुख मनोरंजन एवं स्वास्थ्य वर्धक स्थल सप्तगिरी पार्क इन दिनों बंद पड़ा है। सुरक्षा गार्ड की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए बीएसपी प्रबंधन द्वारा पार्क के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया गया है। सुबह-शाम तफरीह करने वाले, व्यायाम करने वाले युवा और बच्चों को घुमाने ले जाने वाले शहरवासी मायूस होकर लौटने को मजबूर हैं।
पार्क बंद होने से आम नागरिकों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है।गर्मी की छुट्टियों के चलते प्रतिदिन बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों के साथ सप्तगिरी पार्क पहुंच रहे हैं, लेकिन गेट पर ताला लगा देख उन्हें निराशा हाथ लग रही है। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पार्क और समीप स्थित व्यू पॉइंट घूमने पहुंचते हैं, ऐसे में पार्क का बंद रहना पर्यटकों के लिए भी मायूसी का कारण बन रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सप्तगिरी पार्क केवल एक उद्यान नहीं, बल्कि शहरवासियों के स्वास्थ्य, मनोरंजन और पारिवारिक समय बिताने का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां बच्चे झूले और फिसलपट्टी का आनंद लेते हैं। वहीं युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सुबह-शाम टहलने, योग और व्यायाम के लिए पहुंचते हैं। पार्क में मौजूद हरियाली, शांत वातावरण और लगभग 700 मीटर लंबा वॉकिंग ट्रैक इसे शहर का सबसे पसंदीदा स्थल बनाता है। लेकिन पिछले लगभग 10 दिनों से पार्क बंद होने के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि बीएसपी प्रबंधन द्वारा पहले से ही उद्यान को सीमित समय के लिए खोला जाता रहा है और अब सुरक्षा गार्ड नहीं होने का कारण बताकर पार्क को पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है। गर्मी की छुट्टियों में जब बच्चों के पास खेलने और घूमने के सीमित विकल्प रह गए हैं। ऐसे समय में शहर के एकमात्र प्रमुख उद्यान का बंद होना कई सवाल खड़े कर रहा है।इस संबंध में नगर प्रशासक प्रभारी अतुल कालेस एवं उद्यान प्रभारी युवराज साहू ने बताया कि सुरक्षा गार्ड्स का ठेका समाप्त हो चुका है और नए टेंडर के रिन्यूअल की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने के तीन दिनों के भीतर पार्क को पुनः आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। फिलहाल शहरवासी यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही सप्तगिरी पार्क के ताले खुलें, ताकि बच्चे फिर से खेल सकें, बुजुर्ग टहल सकें और गर्मी की छुट्टियों में परिवारों को राहत मिल सके।