० कॉन्टिनेंटल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हुआ सफल इलाज
० न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने किया मरीज का ईलाज
जगदलपुर। सेरिब्रल टीबी के एक जटिल मामले में बेहतर उपचार और मरीज के स्वस्थ होने की सफलता कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को मिली है। बताया जाता है कि मरीज बीते करीब 2 महीनों से टीबी से पीड़ित था। इसके बाद उसे अचानक तेज सिरदर्द की शिकायत हुई। जब वह कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल पहुंचा तो जांच में पता चला कि उसके मस्तिष्क में ट्यूबरकुलर एब्सेस हो गया है। डॉक्टरों ने फौरन मरीज का ऑपरेशन किया और उसे राहत दी।
सेरिब्रल टीबी का यह बस्तर संभाग में पहला मामला है, जिसे कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक ठीक कर दिया है। फिलहाल मरीज को टीबी की दवाओं का पूरा कोर्स करने की सलाह दी गई है। मिली जानकारी के मुताबिक ओडिशा के कोसागुमड़ा के जोबागुड़ा निवासी 33 वर्षीय गोपाल भतरा बीते दो महीनों से फेफड़ों की टीबी से पीड़ित था। करीब एक महीने पहले अचानक उसे तेज सिरदर्द की शिकायत शुरू हो गई। गोपाल के परिजन उसे तेज सिरदर्द के चलते कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लेकर आए। यहां न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने उनका सीटी स्कैन करवाया। सीटी स्कैन में पता चला कि उसके मस्तिष्क के दाहिनी तरफ टीबी का संक्रमण फैल चुका है और इसी संक्रमण के कारण मस्तिष्क में दाहिनी तरफ ही एक बड़ी गठान बन चुकी है। कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने उसकी हालत देख तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि गठान का आकार करीब 6.5 x 5.5 सेंटीमीटर और उसकी मोटाई करीब 3.3 मिलीमीटर तक है। इस बड़ी गठान के कारण मरीज की जान तक जा सकती थी, इसलिए उसे तत्काल निकाला जाना बेहद जरूरी था। करीब 2 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने पहले इस गठान के अंदर भरे 35 मिलीलीटर से ज्यादा मवाद निकाला, इसके बाद उन्होंने पूरी गठान को उसके मस्तिष्क से निकाल दिया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है और कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने उसे टीबी की दवा का कोर्स पूरा करने की सलाह दी है। कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने बताया कि टीबी की शिकायत होने पर अनिवार्य रूप से नियमित तौर पर इसकी दवाएं लेनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर कई तरह की समस्या पैदा हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने मस्तिष्क या दिमागी संबंधी किसी भी समस्या की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।