अधिवक्ता पर जानलेवा हमला, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर। राजधानी रायपुर में अपराधियों के बढ़ते हौसलों ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजातालाब स्थित नूरानी चौक के पास अधिवक्ता रमीज खान पर हुए जानलेवा चाकू हमले के बाद आम लोगों के साथ अधिवक्ता समुदाय में भी भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

जानकारी के मुताबिक, नूरानी चौक के पास एक नशेड़ी युवक ने अधिवक्ता रमीज खान पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया। आरोपी ने उन्हें चार जगह चाकू मारे, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद उन्हें मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। हालांकि इस वारदात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर राजधानी में अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ क्यों खत्म होता जा रहा है।

कमिश्नरेट सिस्टम पर उठने लगे सवाल

राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद दावा किया गया था कि अपराधों पर तेजी से नियंत्रण होगा और पुलिसिंग अधिक प्रभावी बनेगी। लेकिन हाल के दिनों में रायपुर में लगातार चाकूबाजी, गोलीबारी, हत्या, लूट और नशे से जुड़े अपराधों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि सार्वजनिक स्थानों पर भी लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। दिनदहाड़े एक अधिवक्ता पर हमला होना यह दर्शाता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं।

चुनावी माहौल के बीच हुई वारदात

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब रायपुर अधिवक्ता संघ के चुनाव की प्रक्रिया जारी है। 15 मई को मतदान और 16 मई को मतगणना होनी है। इस बार 18 पदों के लिए 66 प्रत्याशी मैदान में हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में अधिवक्ता पर हमला सुरक्षा व्यवस्था पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

“कमिश्नरेट सिस्टम सिर्फ कागजों तक?”

शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर अब लोग खुलकर सवाल उठाने लगे हैं कि करोड़ों रुपये खर्च कर लागू की गई पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली का वास्तविक फायदा क्या हुआ। यदि राजधानी में अपराधी खुलेआम हथियार लेकर घूम रहे हैं और कानून का डर खत्म होता नजर आ रहा है, तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि केवल प्रशासनिक ढांचा बदलने से कानून व्यवस्था मजबूत नहीं होती, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई, लगातार निगरानी और सक्रिय पुलिसिंग जरूरी होती है। फिलहाल रायपुर में बढ़ते अपराध यह संकेत दे रहे हैं कि कमिश्नरेट सिस्टम अपेक्षित परिणाम देने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है।

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