नगर पालिका दंतेवाड़ा में टेंडर से पहले ही करोड़ो के कार्यों की बंदरबांट

० 27 कार्य, 19 ठेकेदार, टेंडर खुलने से पहले ही पूरा खेल सेट 
०  निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल, ठेकेदारों की सूची पहले से तैयार 
जगदलपुर। बस्तर संभाग की दंतेवाड़ा नगर पालिका में टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर चहेते ठेकेदारों को करोड़ों के कार्य बांटने का मामला प्रकाश में आया है। जिसके बाद अब नगर पालिका परिषद दंतेवाड़ा में टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि टेंडर खुलने से पहले ही करोड़ों रुपए के कार्यों का बंटवारा तय कर लिया गया है। इससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका में करीब 27 विकास कार्यों के लिए टेंडर जारी किया जाना है, जिसकी कुल लागत करीब 2 करोड़ रुपए है। टेंडर प्रक्रिया की आधिकारिक तिथि 9 मई 2026 निर्धारित है, लेकिन इससे पहले ही कथित तौर पर 19 ठेकेदारों की एक सूची तैयार कर ली गई है। बताया जा रहा है कि इन ठेकेदारों को पहले ही अलग-अलग काम सौंप दिए गए हैं और उन्हें उसी कार्य के लिए टेंडर भरने के निर्देश दिए गए हैं। जो ठेकेदार बच गए हैं उन्हें यह कहकर मना लिया गया है कि अगला काम उन्हें दिया जाएगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीपाल दास के निर्देश पर संचालित हो रहा है। बगैर टेंडर करोड़ों के कार्यों की बंदरबांट में पालिका अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष भी मुख्य रोल में हैं। सूत्रों की माने तो उपाध्यक्ष कैलाश मिश्रा ने ही ठेकेदारों की सूची तैयार की है। यह लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ है।

नियमों की खुली अनदेखी
सरकारी टेंडर प्रक्रिया का मूल उद्देश्य पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना होता है, ताकि सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर मिल सके। लेकिन यदि टेंडर से पहले ही कामों का बंटवारा कर दिया जाए, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी पैदा करता है। दंतेवाड़ा नगर पालिका में पहले भी कई कार्य बगैर टेंडर के सेटिंग से किए जा चुके हैं। अर्थात काम पहले टेंडर बाद में। इतना ही नहीं कुछ काम तो बिना टेंडर के ही निपटाया जा रहा है। नगर पालिका परिषद दंतेवाड़ा में दिखावे के लिए टेंडर भी बनकर तैयार हो गया है, जिसमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी पालदास के हस्ताक्षर भी चुके हैं। निविदा विज्ञापन में साफ देखा जा सकता है कि जिन कामों के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं, उन्हें कामों के लिए ठेकेदारों की लिस्ट बनाई गई है और बकायदा रेवड़ी कल्चर के तहत ठेकेदारों को काम बांट दिया गया। मामले की शिकायत कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा तक भी पहुंच चुकी है अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में उच्चाधिकारी जिम्मेदारों पर क्या जांच करवाई करते हैं।

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