साल भर काम नहीं होता, अब सुशासन त्यौहार मना कर आवेदन लेंगे – कांग्रेस

रायपुर। साल भर काम नहीं होता, अब सुशासन त्यौहार मना कर आवेदन लेंगे। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सुशासन का दंभ भरने वाली साय सरकार के राज में आम आदमी छोटे-छोटे काम के लिये सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटने को मजबूर है। पटवारी कार्यालय से लेकर तहसील दफ्तरों में लोगो के नामांतरण, फौती, त्रुटि सुधार के लाखों आवेदन लंबित है, लोगों के काम नहीं हो रहे, आम आदमी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर है। बेहद दुर्भाग्यजनक है कि लाखों लोगों को सरकार के पास सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसे रोजमर्रा के कामों के लिये आवेदन देने सरकार के सुशासन तिहार का इंतजार करना पड़ता है। साय सरकार लोगों के मूलभूत काम को भी नहीं कर पा रही है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार किस बात का सुशासन त्यौहार मनाने जा रही?यदि सरकार में सुशासन होता तो लोगों का काम नियमित हो रहा होता तो त्यौहार मनाने की जरूरत क्यों पड़ती? यह सुशासन त्यौहार अपनी विफलता से ध्यान भटकाने का तरीका है। पिछले बार भी सुशासन त्यौहार मनाये थे और जनता से जो लाखों आवेदन प्राप्त हुए उसको कचरे के ढेर में फेंक दिए। इस बार के सुशासन त्यौहार के पहले, पिछले साल के आवेदनों के बारे में जनता को बताये उनका अभी तक निराकरण क्यों नहीं हुआ?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि साय सरकार में युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, आत्मानंद स्कूलों में स्टेशनरी तक नहीं, आरटीई में बच्चों को एडमिशन नहीं हो रहा, सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं हो रहा, राज्य की कानून व्यवस्था समाप्त हो गयी है। मासूम बच्ची के साथ दुराचार करके हत्या कर दी जाती है। राज्य में रोज हत्या, डकैती, बलात्कार हो रहा है। भाजपा की डबल इंजन की सरकार में धान घोटाला हो जाता है। महिलाओं को घटिया साड़ी दी जाती है। आत्ममुग्ध सरकार सुशासन तिहार मना रही है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में सारी व्यवस्थाएं चरमरा गई है। अब तक 135 लाख करोड़ का कर्ज लिया जा चुका है। बिजली कटौती, पेयजल की समस्या, शिक्षकों की कमी, युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, व्यापारी अनियमित जीएसटी से परेशान है। प्रदेश में मात्र 33 प्रतिशत स्टील उद्योग चल रहे हैं, बाकी महंगी बिजली एवं प्रशासनिक अराजकता के चलते बंद हो गए है। अनियमित कर्मचारी, दिव्यांगजन वादाखिलाफी से त्रस्त है। गरीबों को चावल के लिए राशन दुकानों के चक्कर काटना पड़ता है, महतारी वंदन के 1000 रू. के लिए माताओं, बहनों को धूप में केवाईसी कराने घंटों खड़े होना पड़ रहा, 500 रू. में गैस सिलेंडर का वादा जुमला निकला। प्रधानमंत्री आवास को तोड़ा जा रहा है। अवैध शराब की बिक्री जोरों पर है, परिवहन विभाग की वसूली से ट्रांसपोर्टर वाहन चालक त्रस्त है। रोज नए नियम लागू करके जनता को परेशान किया जा रहा है। क्या यही सुशासन है?

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