
0 5 साल से जारी है विरोध, बंद पड़ी फैक्ट्री में फिर शुरू हुआ फिनिशिंग काम
0 ग्रामीणों को नदी, खेती, गांव डूबने का डर
जगदलपुर। बस्तर ब्लॉक की ग्राम पंचायत चपका में गोपाल स्पंज एवं पावर प्रा.लि. रायपुर के खिलाफ ग्रामीणों का बेमियादी धरना आंदोलन तेज हो गया है। 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इस आंदोलन में शामिल हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भी धरना स्थल पर पहुंचे। श्री बैज ने साफ शब्दों में कह दिया है कि ग्रामीणों और बस्तर के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
स्पंज आयरन प्लांट का विरोध सन 2021 से लगातार चल रहा है। ग्रामीणों के विरोध के कारण संयंत्र में कुछ साल काम बंद रहा, लेकिन इस साल फिर से फिनिशिंग का काम शुरू कर दिया गया है। चपका समेत आसपास की 12 पंचायतों के ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री शुरू हुई तो आने वाले समय में हजारों लोगों को बड़ा नुकसान होगा। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री से निकला केमिकलयुक्त पानी चित्रकोट से जुड़ी नदी में जाएगा। इससे नदी का पानी जहरीला होगा। किसान खेती नहीं कर पाएंगे मवेशियों और वन्य पशुओं का पानी पीना मुश्किल होगा। पूरा गांव डूब जाएगा। कंपनी द्वारा पीछे पक्की दीवार बनाई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि दीवार बनने से बरसात में पूरा गांव डूबान क्षेत्र में चला जाएगा। चपका और सोनारपाल गांव में पानी घुस जाएगा। इलाका पहले से ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। फैक्ट्री से निकलने वाले भारी वाहनों से सड़कें टूटेंगी, धूल-धुएं से सांस लेना मुश्किल होगा और प्रदूषण फैलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि हड़ताल जारी रहेगी। हम अपनी जमीन, पानी, खेती किसी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देंगे। विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक फैक्ट्री का काम पूरी तरह बंद नहीं हो जाता। आंदोलन में पूर्व जिला पंचायत प्रत्याशी बबलू राम बघेल, सरपंच सोनारपाल दयाराम बघेल, दीपक गुप्ता, बनमाली बघेल, कमलेश ठाकुर, गुड्डू राम कश्यप, चिंगरू बघेल, लक्ष्मीनाथ बघेल, चंदराम बघेल, मंगलू बघेल, तुलाराम निषाद सहित सैकड़ों ग्रामीण बैठे हैं।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भी धरना स्थल पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। ग्रामीण प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि 2021 में विरोध के बाद बंद हुई फैक्ट्री को फिर से अनुमति किसने दी? पर्यावरण क्लीयरेंस और ग्रामसभा की एनओसी ली गई या नहीं? बाढ़ क्षेत्र में पक्की दीवार बनाने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई?