रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में बालोद जिले में जनवरी 2026 में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जम्बूरी (स्काउट्स एंड गाइड्स) को लेकर कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप जोरदार तरीके से गूंजे। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने सरकार को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए और बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, जिसके बाद मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विधायक राघवेंद्र सिंह ने प्रश्नकाल में पूछा कि छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड का पदेन अध्यक्ष कौन है, जम्बूरी का आयोजन बालोद में कराने का निर्णय कब लिया गया, क्या पहले यह रायपुर में प्रस्तावित था, क्रियान्वयन एजेंसी कौन थी और अनियमितताओं की शिकायतों पर जांच हुई या नहीं।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब में स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ राज्य स्काउट गाइड के पदेन अध्यक्ष स्वयं स्कूल शिक्षा मंत्री होते हैं। राष्ट्रीय जम्बूरी का आयोजन बालोद में करने का निर्णय राष्ट्रीय मुख्यालय, दिल्ली द्वारा लिया गया था। आयोजन की क्रियान्वयन एजेंसी जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद थी। मंत्री ने कहा कि खर्च के लिए छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों का पालन किया गया और किसी अनियमितता से इनकार किया।
हालांकि, विधायक राघवेंद्र सिंह ने मंत्री के जवाब से असहमति जताते हुए आरोप लगाया कि आयोजन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था। पहला टेंडर 10 दिसंबर 2025 को जारी हुआ, जिसे बाद में निरस्त कर 23 दिसंबर 2025 को दोबारा टेंडर किया गया। साथ ही, आयोजन के लिए निर्धारित 90 बिंदुओं को घटाकर 52 कर दिया गया, जो गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। उन्होंने मामले की विधानसभा समिति से जांच कराने की मांग की।
मंत्री गजेंद्र यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और जांच की मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि कोई अनियमितता नहीं हुई।
इसके बावजूद विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच की मांग को लेकर विरोध जताते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया, जिससे सदन का माहौल गरमा गया।