छत्तीसगढ़ विधानसभा में धान खरीदी पर तूफानी बहस: विपक्ष ने मंत्री को घेरा, बस्तर के 44 हजार किसानों का धान नहीं खरीदा, वॉकआउट कर सदन से बाहर निकले कांग्रेस विधायक

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज धान खरीदी का मुद्दा फिर से भड़क उठा। कांग्रेस विधायकों ने खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को घेरते हुए आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ दिखावा करती है, जबकि बस्तर संभाग के हजारों किसानों का धान नहीं खरीदा गया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने वर्ष 2025-26 में बस्तर संभाग में धान खरीदी और उठाव के आंकड़े मांगे। उन्होंने कहा कि किसान लगातार एसडीएम कार्यालय और खरीदी केंद्रों के चक्कर काटते रहे, लेकिन धान नहीं बिका। सबसे बड़ा घोटाला धान खरीदी में हो रहा है—कोई पानी डाल रहा है, तो कोई ईंट खरीद रहा है। उन्होंने पूछा कि कितने किसानों को वनाधिकार पट्टा जारी है और कितने ऋणधारी हैं?

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में आंकड़े पेश करते हुए बताया कि बस्तर संभाग में कुल उठाव इस प्रकार रहा बस्तर 46,846.86 मीट्रिक टन,बीजापुर: 21,888.59 मीट्रिक टन दंतेवाड़ा: 9,757 मीट्रिक टन,कांकेर: 1,47,528.3 मीट्रिक टन,कोंडागांव: 58,911.78 मीट्रिक टन,नारायणपुर: 17,383.06 मीट्रिक टन, सुकमा: 16,608.14 मीट्रिक टन
मंत्री ने कहा कि जितना धान इस वर्ष बिका है, वह किसी भी वर्ष नहीं बिका। जो किसान खरीदी केंद्र तक पहुंचे, उनका धान खरीदा गया।

इस पर लखेश्वर बघेल ने कहा कि ऋणी किसान धान बेचने क्यों नहीं जाएगा? यह सरकार की लचर व्यवस्था है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल किया कि बस्तर के कितने किसानों का दूसरा टोकन कटा लेकिन धान नहीं बेच सके? ऐसे कितने ऋणी किसान हैं? क्या उनका धान खरीदा जाएगा या कर्ज माफ किया जाएगा?

मंत्री ने जवाब दिया कि कांग्रेस सरकार में भी ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा गया था।

पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने भी सवाल उठाया कि बस्तर संभाग के 32,200 से ज्यादा आदिवासी किसानों से धान क्यों नहीं खरीदा गया? उन्होंने कहा कि किसानों को 206 करोड़ रुपये मिलने थे, अब उनका क्या होगा? कर्ज किसे चुकाना पड़ेगा?

मंत्री ने दोहराया कि जो किसान केंद्र तक धान लेकर पहुंचे, उनका धान खरीदा गया। जो नहीं पहुंचे, उनका नहीं खरीदा गया। लखमा ने कहा कि पंजीयन हुआ, टोकन कटा, फिर भी धान नहीं खरीदा गया। जिनका धान नहीं खरीदा गया, उनका कर्ज कौन चुकाएगा?

सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई। विपक्ष ने सरकार पर जबरिया समर्पण, गड़बड़ी और किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की और सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष ने मांग की कि बस्तर के 44,612 किसानों का धान तुरंत खरीदा जाए, जिनका टोकन कट चुका है। साथ ही ऋणी किसानों का कर्ज माफ करने या धान खरीदने की व्यवस्था की जाए। सत्ता पक्ष ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी रही है और जो किसान केंद्र पहुंचे, उनका धान लिया गया।

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