बस्तर में गोवंश संरक्षण संकट में, तस्करी, हादसों पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

 

0 गौसेवकों के प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर से की मुलाकात, सौंपा ज्ञापन 

जगदलपुर। बस्तर संभाग में गोवंश संरक्षण की स्थिति दिनों दिन चिंताजनक होती जा रही है। हैप्पी फ्रेंड्स सोशल वेलफेयर सोसायटी हैप्पी कामधेनु गौशाला के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में जिले में बढ़ती गोवंश तस्करी, रेल दुर्घटनाओं में हो रही मौतों तथा अपर्याप्त पशु चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।
संस्था ने बताया कि वह पिछले दस वर्षों से निःस्वार्थ भाव से गौसेवा में संलग्न है तथा वर्तमान में उसकी गौशाला में 300 से अधिक गोवंश का संरक्षण, पालन-पोषण एवं उपचार किया जा रहा है। किंतु प्रशासनिक सख्ती के अभाव में तस्कर बेखौफ होकर सक्रिय हैं, जिससे गोवंश का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है। संस्था के अनुसार ग्राम पामेला में प्रत्येक रविवार और लोहंडीगुड़ा में शुक्रवार को लगने वाले पशु बाजार गोवंश तस्करी के केंद्र बनते जा रहे हैं, जहां से गोवंश को अन्य राज्यों में अवैध रूप से भेजा जा रहा है। तस्कर भोले-भाले ग्रामीणों को बहला फुसलाकर गोवंश खरीदते हैं और रात्रि के समय परिवहन कर कानून से बच निकलते हैं। संस्था ने मांग की है कि पशु बाजारों में खरीदारों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य किया जाए, खरीद की सीमा तय हो, खरीदे गए गोवंश की तत्काल टैगिंग व ऑनलाइन पंजीयन हो तथा गोवंश का परिवहन केवल दिन के समय ही किया जाए। साथ ही जिला एवं खंड स्तर पर गठित समितियों के माध्यम से सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर बजरंग दल जिला संयोजक मुन्ना बजरंगी ने कहा कि गोवंश की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि पशु बाजारों और परिवहन व्यवस्था पर तत्काल सख्ती नहीं की गई तो स्थिति और भयावह हो सकती है। हम प्रशासन से आग्रह करते हैं कि तस्करी पर कड़ा प्रहार करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए तथा गौशालाओं और सेवा कार्यों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। संस्था ने रेल दुर्घटनाओं में प्रतिदिन हो रही गोवंश की मौतों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है। जिले से गुजरने वाली मालगाड़ियों एवं यात्री ट्रेनों से टकराकर बड़ी संख्या में गोवंश व अन्य पशु काल का शिकार बन रहे हैं, जबकि घायल पशुओं को समय पर उपचार न मिल पाने से उनकी जान बचाना कठिन हो जाता है। संस्था का कहना है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर रेलवे पटरियों के दोनों ओर फेंसिंग कराई जाने से इन हादसों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।इसके अतिरिक्त जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र में संचालित डेयरी संकुलों को शहर से बाहर चिन्हित भूमि पर स्थानांतरित करने की मांग करते हुए कहा गया है कि इससे सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गोवंश की समस्या से राहत मिलेगी और यातायात दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। साथ ही जिला पशु चिकित्सालय के सीमित संचालन समय पर सवाल उठाते हुए संस्था ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के कारण बीमार और घायल गोवंश के उपचार में गंभीर कठिनाइयाँ आती हैं, अतः पशु चिकित्सालय को 24 घंटे संचालित किया जाना आवश्यक है। हैप्पी फ्रेंड्स सोशल वेलफेयर सोसायटी ने प्रशासन से अपील की है कि गोवंश संरक्षण से जुड़े इन सभी मुद्दों की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि बस्तर अंचल में गौवंश की रक्षा सुनिश्चित हो सके और गौसेवा के प्रयासों को मजबूती मिल सके।

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