कोण्डागांव। छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले में रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा हुआ है जिसने सरकारी महकमे में हड़कंप मचा दिया है। गुमास्ता लाइसेंस पंजीयन के नाम पर आवेदकों से ₹5000 की रिश्वत वसूली का मामला सामने आते ही जिला प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए दो संविदा कर्मचारियों को फौरन बर्खास्त कर दिया और श्रम उप निरीक्षक को निलंबित कर दिया है। साथ ही जिला श्रम अधिकारी पर भी गाज गिरने वाली है, उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया है।
शिकायत पहुंची कलेक्टर तक, कार्रवाई में नहीं लगी देर
जानकारी के मुताबिक, श्रम विभाग के संविदा कर्मचारी सिंधु नाथ मंडल और उमा शंकर साहू पर आरोप था कि वे गुमास्ता पंजीयन के लिए आने वाले भोले-भाले व्यापारियों से खुलेआम ₹5000 की डिमांड कर रहे थे। यह बात जब सीधे कलेक्टर के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने तुरंत जांच के आदेश दिए। जांच में आरोप सौ फीसदी सही पाए गए।
बर्खास्तगी, सस्पेंशन और नोटिस – तीन तरफा एक्शन
जांच रिपोर्ट मिलते ही प्रशासन ने दोनों रिश्वतखोर संविदा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। साथ ही, श्रम उप निरीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है। अब उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिला श्रम अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, उन्हें तीन दिन में जवाब देने को कहा गया है, वरना अगली कार्रवाई तय है।
प्रशासन ने दिया कड़ा संदेश – भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। गुमास्ता पंजीयन या किसी अन्य सरकारी सेवा से जुड़ा व्यक्ति अगर रिश्वत मांगता है तो उसकी जगह सीधी बर्खास्तगी है। साथ ही, आम जनता से अपील की गई है कि अगर उनसे कोई रिश्वत मांगे, तो सीधे उच्च अधिकारियों या कलेक्टर से शिकायत करें।