रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में सरगुजा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट (छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है) के विकास कार्यों को लेकर जोरदार बहस हुई। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने टेंडर प्रक्रिया, अधूरे निर्माण, रखरखाव व्यवस्था और लागत पर सरकार को कड़ा घेराव किया।
विधायक टोप्पो ने पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल से सवाल किया कि मैनपाट में पर्यटन विकास कार्य किस कंपनी को दिए गए? क्या डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) के अनुसार सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे हुए हैं? मंत्री राजेश अग्रवाल ने जवाब देते हुए बताया कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत कुल 32 कार्य स्वीकृत हुए थे, जिन्हें टीसीआईएल द्वारा क्रियान्वित किया गया। चेन फेंसिंग और गार्ड रूम जैसे कार्यों की कुल लागत लगभग 141.98 लाख रुपये बताई गई।
हालांकि, विधायक टोप्पो ने दावा किया कि चेन फेंसिंग का कार्य अभी भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि करीब 95 लाख रुपये के कार्य में से 30 से 40 लाख रुपये का काम नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर समस्याएं बनी हुई हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि डीपीआर के अनुसार सभी स्वीकृत कार्य पूरे कर लिए गए हैं, लेकिन पानी की कमी के कारण कुछ कार्यों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष ने सदस्यों की उपस्थिति में भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए, जिस पर मंत्री ने सहमति जताई।
रखरखाव व्यवस्था पर भी तीखे सवाल उठे। मंत्री ने बताया कि दिसंबर तक रखरखाव का कार्य टीसीआईएल द्वारा किया जा रहा था, जबकि अब यह जिम्मेदारी विभाग खुद संभाल रहा है। इसके लिए प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से दो मैनेजर नियुक्त किए गए हैं। विधायक ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि विभाग किस आधार पर और किस प्रक्रिया से कार्य कर रहा है, साथ ही हर महीने 68 हजार रुपये से अधिक केवल मेंटेनेंस पर खर्च होने की बात कही। परियोजना के क्षेत्रफल के बारे में मंत्री ने बताया कि यह 18.5 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की जा रही है, जिसमें कुछ हिस्से अभी निर्माणाधीन हैं।
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मंत्री से पूछा कि क्या उन्होंने मंत्री बनने के बाद मैनपाट का दौरा किया है। इस पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि वे हाल ही में आयोजित मैनपाट महोत्सव के दौरान वहां गए थे और लोकसभा सांसद मनोज तिवारी को भी मैनपाट घुमाया था।