भोपाल पटनम/बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। जिले में दो-दो शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना के बावजूद सरकारी स्कूलों में बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है।
भोपाल पटनम क्षेत्र सहित जिले के कई प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में शौचालयों की हालत बेहद खराब है। कई स्कूलों में शौचालय बने तो हैं, लेकिन नियमित सफाई नहीं होने और पानी की व्यवस्था न होने से छात्र-छात्राएं उनका उपयोग करने से कतराते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छात्राओं पर पड़ रहा है।

पीने के पानी की समस्या भी गंभीर बनी हुई है। कई स्कूलों में बच्चों को हैंडपंप या बोरवेल का ऐसा पानी पीना पड़ रहा है, जिसमें अत्यधिक आयरन की शिकायत है। पानी का रंग और स्वाद अलग होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। कई जगहों पर लगे वॉटर फिल्टर खराब पड़े हैं या उनका रखरखाव नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण स्कूलों में सफाई व्यवस्था भी लचर है। परिसर में गंदगी फैली रहती है और शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती। पानी की टंकियां और फिल्टर सिस्टम होने के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि वे बार-बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका सवाल है कि जब जिले में दो शिक्षा अधिकारी मौजूद हैं, तो फिर निगरानी और सुधार क्यों नहीं हो पा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि स्कूलों में स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी उतना ही जरूरी है।
अब लोगों की नजर प्रशासन और सरकार पर है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाती है। मांग की जा रही है कि स्कूलों में स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय और नियमित सफाई को प्राथमिकता दी जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। यदि समय रहते हालात नहीं सुधरे, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ेगा, जो भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।