
जगदलपुर। नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में पहली बार एक ही स्थान पर एक साथ 108 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े इन कैडरों में 4 महिला नक्सली भी शामिल हैं। इन सभी पर कुल मिलाकर लगभग 3 करोड़ 29 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित शौर्य भवन पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर, लालबाग में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम में यह बड़ी सफलता मिली। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्सल ऑपरेशन) विवेकानंद, बीएसएफ के एडीजी सिवांग नामग्याल, बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी., सीआरपीएफ के आईजी शालीन, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के आईजी बी.एस. ध्रुव सहित केंद्रीय बलों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बड़े नक्सली कैडरों ने छोड़ा संगठन
आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के कई अहम पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें पश्चिम बस्तर डिवीजन के डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM) राहुल तेलाम, पंडरु कोवासी और झितरु ओयाम, पूर्व बस्तर डिवीजन के DVCM रामधर उर्फ बीरु, उत्तर बस्तर डिवीजन के DVCM मल्लेश, पीएलजीए बटालियन नंबर-01 के CYPC कमांडर मुचाकी और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर के DVCM कोसा मंडावी जैसे नाम प्रमुख हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में 5 डिवीजनल कमेटी सदस्य, 2 जोनल स्तर के पीएलजीए कंपनी पदाधिकारी, 15 प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य, 21 एरिया कमेटी सदस्य और 63 पार्टी सदस्य शामिल हैं।
101 घातक हथियारों की बरामदगी
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों से मिली सूचना और अन्य खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं। बरामद हथियारों में एके-47, इंसास राइफल, एलएमजी, एसएलआर, .303 राइफल, 12 बोर राइफल, बीजीएल लांचर, मोर्टार सहित कुल 101 घातक हथियार शामिल हैं।
इनमें नारायणपुर जिले से 49, बस्तर से 24, सुकमा से 12, बीजापुर से 9, दंतेवाड़ा से 5 और कांकेर से 2 हथियार बरामद किए गए।
3.61 करोड़ नगद और 1 किलो सोना बरामद
कार्रवाई के दौरान माओवादियों के डंप से 3 करोड़ 61 लाख रुपये नगद और लगभग 1 किलोग्राम सोना भी बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 64 लाख रुपये बताई जा रही है। नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में एक ही स्थान से इतनी बड़ी नकदी बरामदगी को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
‘पूना मारगेम’ अभियान का असर
पुलिस अधिकारियों के अनुसार “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल का लगातार सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। बीते 26 महीनों में छत्तीसगढ़ में कुल 2714 माओवादी कैडर हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। वहीं बस्तर संभाग में 1 जनवरी 2024 से 9 मार्च 2026 तक कुल 2625 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन अपनाया है।
पुनर्वास की मिलेगी सुविधा
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत इन कैडरों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन के लिए मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने शेष माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। उन्होंने कहा कि सरकार उनके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।