0 बस्तर के दो वीर बालकों के अदम्य साहस की बेमिसाल दास्तां
0 पेड़ पौधों को बचाने आग की लपटों से लड़ते रहे मुना और तिलक
(अर्जुन झा)बकावंड। आदिवासियों को प्रकृति का पुजारी और जंगल का रखवाला यूं ही नहीं कहा जाता। प्रकृति और जंगल की रक्षा के लिए वे अपनी जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटते। कुछ ऐसा ही बेमिसाल कारनामा कर दिखाया है बकावंड विकासखंड के दो वीर बालकों ने। इन बच्चों ने जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए जिस अदम्य साहस का परिचय दिया है, उसे देख और सुनकर बड़े बड़े लोग दांतों तले उंगली दबाने मजबूर हो गए हैं। इन नन्हे वीरों ने देश दुनिया को वनों के संरक्षण के लिए बड़ा संदेश दिया है।
बकावंड विकासखंड के करपावंड वन परिक्षेत्र के जंगलों से वीरता और पर्यावरण प्रेम की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने बड़ों-बड़ों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। करपावंड रेंज के अंतर्गत मोखागांव के जंगलों में शनिवार को अचानक भीषण आग की लपटें उठने लगीं। आग बुझाने के लिए सरकारी अमले के साथ दो ऐसे जांबाज भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए जिनकी उम्र अभी खेलने-कूदने की है। धनपुर गांव निवासी मंगलू के 8 वर्षीय बेटे मुना और मीनाधर के 10 वर्षीय पुत्र तिलक ने जंगल को जलता देख अद्भुत साहस और सूझबूझ से वन विभाग के कर्मचारियों को भी हैरत में डाल दिया। जैसे ही इन बच्चों ने जंगल में आग की लपटें देखीं, उन्हें अपने भविष्य का आधार जलता महसूस हुआ। बिना किसी हिचकिचाहट या सरकारी आदेश के इंतजार के, ये दोनों बच्चे स्वप्रेरित होकर आग बुझाने के काम में जुट गए। बच्चों के इस निस्वार्थ और साहसिक कदम ने मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारियों में भी उत्साह का संचार कर दिया। नन्हे हाथों को आग से लड़ते देख कर्मचारियों का मनोबल इतना बढ़ा कि सभी ने मिलकर बेहद कम समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। मासूमों के इस जज्बे ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में इच्छाशक्ति हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
प्रेरणास्त्रोत हैं बच्चे : गुप्ता
मुना और तिलक के इस अभूतपूर्व साहस पर प्रतिक्रिया देते हुए बस्तर के वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने बच्चों की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने जंगल की रक्षा के प्रति जो समर्पण दिखाया है, वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। विभाग ने इस साहस का सम्मान करने का निर्णय लिया है और इन बच्चों को जल्द ही औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। वन मंडलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि इन बच्चों की सोच हमें यह सिखाती है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हमारा भविष्य हैं। वन विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपनी प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए जागरूक बनें। विभाग ने चेतावनी दी है कि वनों में आग लगाना भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। अधिकारियों ने बस्तरवासियों से अनुरोध किया है कि यदि कहीं भी वनों में अग्नि की घटना दिखाई दे, तो तत्काल फायर कंट्रोल रूम के टोल फ्री नंबर 1800 233 7000 पर इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते प्रकृति को विनाश से बचाया जा सके।
अभिभूत हूं मैं: मंत्री कश्यप
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि मुना और तिलक की बहादुरी की खबर उन्हें भी मिली है। उन्होंने कहा कि ये बच्चे हमारे बस्तर संभाग की शान हैं। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा साहस, सुनकर हैरान हूं, मेरे पास इन बच्चों की तारीफ के लिए शब्द नहीं हैं। मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अबकी बार जगदलपुर आऊंगा तो इन बच्चों से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाऊंगा। श्री कश्यप ने कहा कि प्रकृति, पर्यावरण, पेड़, पौधे, जंगल, पहाड़, नदियों से प्रेम करना हम आदिवासियों को बचपन से सिखाया जाता है। यह हमारा वंशानुगत गुण भी होता है। जंगल बॉय चेंदरु के साथ ही मुना और तिलक का नाम भी बस्तर के साहसी बालकों की सूची में दर्ज हो गया है। मंत्री केदार कश्यप ने आम लोगों से जंगल, पेड़, पौधों की रक्षा के लिए सदैव चौकस रहने की अपील है।