0 अजय चंद्राकर का सवाल – “संगठित या असंगठित?” सरकार बोली – केंद्र के नियमों का करेंगे इंतजार
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान गिग इकोनॉमी में कार्यरत हजारों युवाओं की सुरक्षा, अधिकार और शोषण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन से पूछा कि Swiggy, Zomato, Blinkit और Rapido जैसी कंपनियों में कार्यरत गिग वर्कर्स को संगठित मजदूरों की श्रेणी में रखा जाएगा या असंगठित में?
गिग वर्कर मर रहे हैं, कंपनियां ऐश कर रही हैं
विधायक चंद्राकर ने सदन में कहा गिग वर्कर मर रहे हैं और कंपनियां ऐश कर रही हैं। 10 मिनट की डिलीवरी जैसे दबाव में कई बार जान जा रही है। मानवाधिकार संगठन भी लगातार चिंता जता रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के मामले में भी सरकार ने पहले स्पष्ट कानून नहीं होने की बात कही थी और आज गिग वर्कर्स के मामले में भी वही स्थिति बनी हुई है।
2020 की संहिता, पर राज्य में नियम नहीं
चंद्राकर ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 लागू होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए। उनके अनुसार, 2025 में भारत सरकार को नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा क्योंकि राज्यों में नियम नहीं बन पाए थे, जबकि कई राज्यों ने अपने स्तर पर पहल की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या छत्तीसगढ़ समवर्ती सूची के अधिकार का उपयोग करते हुए गिग वर्कर्स के लिए अलग अधिनियम या नियम बनाने पर विचार करेगा?
मंत्री लखनलाल देवांगन ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया फिलहाल गिग वर्कर्स को न तो संगठित क्षेत्र में रखा गया है और न ही असंगठित क्षेत्र में। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल किया गया है। जैसे ही भारत सरकार इस संबंध में नियम अधिसूचित करेगी, राज्य सरकार उसका पालन करेगी। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने इस विषय पर एक समिति गठित की थी, लेकिन केंद्र द्वारा चार श्रम संहिताएं लागू करने के बाद राज्य की कार्यवाही केंद्र के अधिनियम के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने दोहराया कि राज्य स्तर पर अलग नियम बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।