बस्तर के युवाओं को गुमराह करने की साजिश बर्दाश्त नहीं: माओवादी हिडमा नहीं, अमर शहीद गुंडाधुर हैं आदिवासियों के असली रोल मॉडल – सांसद महेश कश्यप

​जगदलपुर। बस्तर के वर्तमान परिदृश्य और आदिवासी युवाओं की दिशा को लेकर सांसद महेश कश्यप ने एक गंभीर और विस्तृत वक्तव्य जारी किया है। उन्होंने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित भूमकाल स्मृति दिवस के दौरान हुई कुछ घटनाओं पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि क्षेत्र में कुछ लोग एक सोची-समझी रणनीति के तहत माओवादी कमांडर माड़वी हिडमा जैसे हिंसा के प्रतीकों को युवाओं का आदर्श बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कश्यप ने इसे बस्तर की गौरवशाली संस्कृति और शांतिप्रिय आदिवासी समाज के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया है।

​सांसद ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि बस्तर का इतिहास संघर्ष और बलिदान का रहा है, लेकिन वह संघर्ष हमेशा न्याय और अपनी माटी की रक्षा के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से “जल-जंगल-ज़मीन” जैसे पवित्र नारों का दुरुपयोग कर आदिवासियों को भ्रमित किया गया और अब उसी की आड़ में हिंसा को महिमामंडित करने का खतरनाक खेल खेला जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि माओवादी विचारधारा ने बस्तर को केवल विकास की मुख्यधारा से पीछे धकेलने, हजारों निर्दोष ग्रामीणों का खून बहाने और बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को बाधित करने का काम किया है।

​सांसद कश्यप ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की पहचान कभी भी बंदूकों से नहीं, बल्कि उनके वीर नायकों के त्याग से रही है। उन्होंने वीर गुंडाधुर, डेबरीधुर और झाड़ा सिरहा जैसे महान क्रांतिकारियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने विदेशी हुकूमत और अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, न कि निर्दोषों की हत्या की थी। उन्होंने कहा कि असली प्रेरणास्रोत वे हैं जिन्होंने बस्तर की अस्मिता और देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

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